डीडवाना-कुचामन। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान हुए काले झंडा प्रदर्शन और उसके बाद लगातार तेज हुए राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच कुचामन तहसीलदार कैलाश ईनाणिया के तबादले के बाद जिले में एक और बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। राजस्थान सरकार ने डीडवाना-कुचामन के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ज्ञान चंद्र यादव का तबादला कर दिया है। उन्हें अब पुलिस मुख्यालय, सिविल राइट्स, जयपुर में पुलिस अधीक्षक पद पर लगाया गया है।
शनिवार देर शाम जारी कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार वर्ष 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी ज्ञान चंद्र यादव के स्थान पर वर्ष 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी डॉ. प्यारे लाल शिवरान को डीडवाना-कुचामन जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।
गौरतलब है कि पिछले दो दिनों से कुचामन जिले की राजनीति और प्रशासन लगातार सुर्खियों में है। 29 मई को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान RLP कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले के सामने आकर काले झंडे दिखाए थे और सरकार विरोधी नारेबाजी की थी। इस दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। बाद में शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं को जमानत मिल गई थी।

इसके बाद शुक्रवार देर रात RLP नेता रामनिवास पोषक समेत कुछ कार्यकर्ताओं की एक पुराने मामले में पुनः गिरफ्तारी हुई, वहीं कुचामन सिटी के तहसीलदार कैलाश ईनाणियां का भी तबादला कर दिया गया। अब एसपी ज्ञान चंद्र यादव के तबादले के आदेश सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में तबादले का कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है और इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया स्थानांतरण माना जा रहा है। बावजूद इसके, हालिया घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में इस बदलाव को लेकर जिले में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

लोगों का कहना है इस जिले में एक दिन में दो बार “करे कोई भरे कोई” मुहावरे को चरितार्थ किया गया है । लोगों का कहना है कि पहले RLP कार्यकर्ताओं को जमानत पर रिहा करने वाले कुचामन तहसीलदार कैलाश ईनाणिया का रातों – रात तबादला किया गया और अब जिला पुलिस अधीक्षक ज्ञान चंद्र यादव का तबादला कर दिया गया ,जबकि मामले में अगर लापरवाही मानी जाए तो अधीनस्थ अधिकारियों की मानी जानी चाहिए ।
डीडवाना-कुचामन जिले में लगातार हो रहे प्रशासनिक फेरबदल ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है तथा आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
