राजभवन में भावुक पल: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गिरीश व्यास का किया भव्य स्वागत, स्व. बच्छराज व्यास को श्रद्धापूर्वक किया स्मरण

डीडवाना की धरती से जुड़ा एक आत्मीय और गौरवपूर्ण क्षण उस समय सामने आया जब नागपुर प्रवासी और महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व सदस्य गिरीश व्यास का राजस्थान राजभवन में राज्यपाल महामहिम हरिभाऊ बागडे ने शॉल ओढ़ाकर और अपने जीवन पर आधारित पुस्तक भेंट कर विशेष सम्मान किया। इस अवसर पर राजभवन में आत्मीयता से भरा वातावरण रहा और लगभग तीन घंटे तक चली मुलाकात में पुरानी स्मृतियाँ ताज़ा होती रहीं।

गिरीश व्यास अपनी धर्मपत्नी और पुत्र आदित्य व्यास के साथ राजभवन पहुँचे थे। राज्यपाल ने पूरे परिवार के साथ आत्मीय संवाद किया और पारिवारिक रूप से साथ बैठकर भोजन भी किया। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भावनाओं और स्मृतियों से जुड़ा एक विशेष अवसर बन गई।

“स्व. बच्छराज जी ने मुझे स्वयंसेवक बनाया” – राज्यपाल

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बातचीत के दौरान स्वर्गीय पंडित बच्छराज जी व्यास को याद करते हुए कहा कि उन्हें स्वयं शाखा में जाने और स्वयंसेवक बनने की प्रेरणा बच्छराज जी से ही मिली थी। उन्होंने कहा, “आप भाग्यशाली हैं कि आप उनके पुत्र हैं।”

राज्यपाल ने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि स्व. बच्छराज जी कहा करते थे कि संघ एक दिन विशाल वृक्ष के रूप में पूरे भारतवर्ष में अपनी शाखाएँ फैलाएगा। वे अक्सर उदाहरण देते हुए कहते थे कि “100 मन लकड़ी में एक मकड़ी” और अटल संकल्प, राष्ट्रभक्ति व संस्कृति संरक्षण की प्रेरक कविताएँ जैसे —

“तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें…” — सुनाया करते थे।

राज्यपाल ने यह भी बताया कि वे हाल ही में डीडवाना जाकर स्व. बच्छराज व्यास की जन्मभूमि के दर्शन कर चुके हैं और पुनः वहाँ जाने की इच्छा रखते हैं, ताकि उनकी स्मृतियों को नमन कर सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे महान नेताओं के कारण ही हमारी संस्कृति और अखंड भारत की भावना सुरक्षित है।

“राजस्थान हमारी मातृभूमि, नागपुर कर्मभूमि” – गिरीश व्यास

गिरीश व्यास ने इस अवसर पर कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें अपने पिताजी के शिष्यों से मिलने का अवसर मिलता है, जो आज देश के संवैधानिक पदों पर आसीन हैं। उन्होंने कहा, “राजस्थान हमारी मातृभूमि है, लेकिन हमारा कर्मक्षेत्र नागपुर रहा है।”

उनकी बातों में अपने पिता की विरासत के प्रति गर्व और भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट झलक रहा था।

वरिष्ठ पत्रकार गोविंद व्यास का भी सम्मान

इस अवसर पर डीडवाना के वरिष्ठ पत्रकार गोविंद व्यास भी गिरीश व्यास के साथ मौजूद थे। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उनका भी राजभवन में शॉल ओढ़ाकर और पुस्तक भेंट कर अभिनंदन किया। यह क्षण डीडवाना के लिए विशेष गौरव का विषय बना।

जानिए ,कौन थे डीडवाना के स्वर्गीय पंडित बच्छराज व्यास?

राष्ट्रवादी विचारधारा के सशक्त स्तंभ

स्वर्गीय पंडित बच्छराज व्यास डीडवाना की उस विभूति का नाम है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ की विचारधारा को मजबूत आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भारतीय जनसंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और राष्ट्रवादी चिंतन के प्रमुख प्रवक्ता के रूप में पहचाने जाते थे। बच्छराज व्यास का जीवन सादगी, अनुशासन और संगठनात्मक क्षमता का उदाहरण था। वे युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करते थे और शाखा के माध्यम से चरित्र निर्माण पर बल देते थे। उनकी वाणी में ओज था और विचारों में स्पष्टता। वे अक्सर कविताओं और उदाहरणों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का संदेश देते थे।

उन्होंने वर्षों पहले कहा था कि संगठन एक दिन विशाल वृक्ष बनेगा और पूरे देश में अपनी शाखाएँ फैलाएगा। उनका यह विश्वास आज एक सशक्त संगठनात्मक संरचना के रूप में देखा जा सकता है। उनके विचारों ने अनेक कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्रेरित किया, जिनमें वर्तमान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे भी शामिल हैं।

डीडवाना की गौरवशाली पहचान

डीडवाना की धरती ने बच्छराज व्यास जैसे व्यक्तित्व को जन्म दिया, जिनकी स्मृतियाँ आज भी क्षेत्रवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके योगदान को याद करते हुए राज्यपाल का यह सम्मान समारोह न केवल एक पारिवारिक मिलन था, बल्कि डीडवाना की ऐतिहासिक विरासत का भी सम्मान था।

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