मकराना में ‘सांड राज’ का आतंक: आज फिर मासूम शिवम पर हमला, फ़ाईजा के दर्द ने जगाई इंसानियत, अब सड़कों पर उतरेंगे विधायक


हर गली में डर, हर मोड़ पर खतरा — आखिर कब जागेगा प्रशासन?


मकराना शहर में आवारा सांडों, निराश्रित गोवंश और आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। शहर की सड़कों पर हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि लोग अब घर से निकलने से पहले सड़क की ओर देखकर यह तय करते हैं कि कहीं सामने कोई सांड तो नहीं खड़ा। बच्चों को अकेले बाजार भेजने में परिवार डरने लगे हैं और बुजुर्गों के लिए सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं रहा।
इसी भयावह स्थिति के बीच शनिवार को एक और मासूम बच्चा शिवम सांड के हमले में घायल हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार शहर में यह कोई पहली घटना नहीं है। रोजाना सांडों के हमलों और आवारा कुत्तों की दहशत की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक स्थायी समाधान निकालने में पूरी तरह नाकाम नजर आ रहे हैं।


11 वर्षीय फ़ाईजा अब भी दर्द में, 18 टांकों के बाद भी आंख में सूजन


तीन दिन पहले वार्ड नंबर 44 स्थित ठाकुर साहब की आखली, मानधानिया की छतरियों के पास रहने वाली 11 वर्षीय फ़ाईजा भी इसी आतंक का शिकार बनी थी। फ़ाईजा अपने चचेरे भाई के साथ बाइक पर घर लौट रही थी, तभी गली में एक सांड ने दोनों भाई-बहन पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांड ने फ़ाईजा को सींगों पर उठाकर पटक दिया, जिससे उसकी आंख और सिर के आसपास गंभीर चोटें आईं। घायल हालत में परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने 18 टांके लगाए। हादसे के बाद दो दिन तक उसकी आंख से लगातार खून बहता रहा और अब भी आंख के आसपास भारी सूजन बनी हुई है, बच्ची अभी तक आंख नहीं खोल पा रही है ।


फ़ाईजा के पिता मोहम्मद शकील का करीब डेढ़ साल पहले निधन हो चुका है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में रह रही बच्ची अपने चाचा गुलाम मोहम्मद के पास पल रही है। इलाज का खर्च परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था, लेकिन इस दर्दनाक घटना के बाद मकराना में इंसानियत के हाथ भी आगे बढ़ने लगे हैं।


मदद के लिए आगे आए लोग, QR कोड से शुरू हुआ सहयोग अभियान


फ़ाईजा की स्थिति की जानकारी सामने आने के बाद शहरभर से लोग मदद के लिए आगे आने लगे हैं। उसकी माता के बैंक खाते के QR कोड के माध्यम से आर्थिक सहयोग का सिलसिला शुरू हुआ, जो लगातार जारी है। सोशल मीडिया पर भी लोग फ़ाईजा की मदद की अपील कर रहे हैं।

यह फ़ाईजा की माता गुलअफ्शा बेगम के बैंक एकाउंट का QR कोड है । आप भी चाहे तो इस पीड़ित परिवार की मदद कर सकते है ।


लगन शाह मेमोरियल हॉस्पिटल ने किया निःशुल्क इलाज का ऐलान


फ़ाईजा के दर्द ने सामाजिक संस्थाओं को भी झकझोर दिया। शहर के लगन शाह मेमोरियल हॉस्पिटल प्रबंधन ने बच्ची के निःशुल्क इलाज का ऐलान किया है। रविवार को अस्पताल में चिकित्सकों ने फ़ाईजा की जांच की।
संस्था के सचिव सलामुद्दीन उर्फ बाबू भाई ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन अपनी पूरी क्षमता के अनुसार फ़ाईजा का इलाज निशुल्क करवाएगा। उन्होंने कहा कि संस्था हमेशा जरूरतमंद और बेसहारा लोगों के उपचार के लिए आगे आती रही है और आगे भी यह सेवा जारी रहेगी।


सलामुद्दीन ने कहा कि मकराना में आवारा पशुओं की समस्या अब मानवीय संकट बन चुकी है। रोजाना लोग घायल हो रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए।


विधायक जाकिर गैसावत बोले — “प्रशासन जनता को भगवान भरोसे छोड़ चुका है”


फ़ाईजा की जानकारी मिलने के बाद मकराना विधायक जाकिर गैसावत ने बच्ची और उसके परिजनों को अपने निवास पर बुलाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।


विधायक गैसावत ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मकराना से जुड़ी हर समस्या के समाधान में स्थानीय प्रशासन विफल साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि शहर की जनता परेशान है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी कोई फिक्र नहीं दिखाई देती।
उन्होंने कहा कि मकराना की हर गली में सांडों का आतंक है और कई मोहल्ले आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहे हैं। रोजाना हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई गंभीर संज्ञान नहीं लिया जा रहा, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।


विधायक गैसावत ने सोमवार सुबह मकराना एसडीएम कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों, निराश्रित गोवंश और सांडों की समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा, “जनता अब डर के माहौल में जी रही है। बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं और महिलाएं बाजार निकलने से। आखिर प्रशासन कब जागेगा?”


जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने कहा — “समस्या के समाधान के पूरे प्रयास होंगे”


डीडवाना-कुचामन जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर अवधेश मीणा ने कहा कि वे मकराना नगर परिषद आयुक्त और उपखंड अधिकारी से बात कर आवश्यक निर्देश जारी करेंगे।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि मकरानावासियों को आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रशासन स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।


सवाल अब भी वही — क्या अगली घटना का इंतजार है?


मकराना में लगातार हो रहे हमलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — आखिर कब तक लोग सांडों और आवारा कुत्तों के डर में जीते रहेंगे? क्या हर बड़ी कार्रवाई के लिए किसी मासूम के लहूलुहान होने का इंतजार जरूरी है?
फिलहाल शहर में गुस्सा भी है, डर भी है और उम्मीद भी — कि शायद अब प्रशासन जागे, और मकराना की सड़कों पर इंसानों का हक फिर से लौट सके।

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