कुचामन में चुनावी हार के बाद राजेंद्र कुमावत की पीड़ा सामने आई, बोले: ‘अपनों ने ही हराने में निभाई भूमिका’’


वार्ड 12 से भाजपा प्रत्याशी रहे राजेंद्र की सोशल मीडिया पोस्ट से सियासी चर्चा तेज, पिता स्वर्गीय हरीशचंद्र कुमावत की राजनीतिक विरासत का भी किया जिक्र


कुचामन सिटी। भले ही कुचामन नगर परिषद चुनाव में भाजपा की जीत हो गई है लेकिन चुनाव के बाद कुचामन भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वार्ड नंबर 12 से भाजपा प्रत्याशी रहे राजेंद्र कुमावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए वार्ड चुनाव में मिली खुद की हार को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की है। राजेंद्र कुमावत का कहना है कि उन्हें चुनाव हराने में उनकी ही पार्टी से जुड़े और सभापति पद के दावेदार रहे कई लोगों की भूमिका रही।


राजेंद्र कुमावत ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं खुद राजेंद्र कुमावत वार्ड नंबर 12 से नगर परिषद कुचामन भारतीय जनता पार्टी वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा था। मुझे चुनाव हराने में कई सभापति उम्मीदवारों की खूब भूमिका रही। लेकिन स्वर्गीय हरीशचंद्र जी कुमावत, पूर्व विधायक नावा को अपने स्वार्थ में भूल जाते हैं और उनकी दुआ भी देते हैं। यह भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत विचारणीय व अफसोस की बात है।”


राजेंद्र की इस पोस्ट के बाद भाजपा के भीतर चुनाव के दौरान बने राजनीतिक समीकरणों और पार्टी प्रत्याशियों के बीच आपसी समर्थन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, राजेंद्र कुमावत ने अपनी पोस्ट में किसी भी सभापति उम्मीदवार का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया है।


वार्ड 12 में दीनदयाल ने हराया था राजेंद्र कुमावत को


नगर परिषद कुचामन सिटी के वार्ड नंबर 12 में कांग्रेस प्रत्याशी दीनदयाल कुमावत ने भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र कुमावत को शिकस्त दी थी। चुनाव परिणाम के अनुसार दीनदयाल कुमावत को 505 वोट, जबकि राजेंद्र कुमावत को 311 वोट मिले। इस तरह दीनदयाल ने 194 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वार्ड 12 में दीनदयाल कुमावत कांग्रेस प्रत्याशी और राजेंद्र कुमावत भाजपा प्रत्याशी थे।

अब चुनाव परिणाम के बाद जब दीनदयाल कुमावत को कांग्रेस की ओर से उपसभापति पद का प्रत्याशी बनाए जाने की बात सामने आई, उसी बीच राजेंद्र कुमावत की सोशल मीडिया पोस्ट ने स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।


पिता की राजनीतिक विरासत का भी जिक्र


राजेंद्र कुमावत भाजपा के वरिष्ठ नेता और नावा के पूर्व विधायक स्वर्गीय हरीशचंद्र कुमावत के पुत्र हैं। उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों के अनुसार हरीशचंद्र कुमावत नावा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे थे। उन्हें नागौर जिले में भाजपा के संगठन को मजबूत करने वाले प्रमुख नेताओं में गिना जाता है और उन्हें “नागौर भाजपा का भीष्म पितामह” भी कहा जाता है ।


यही वजह है कि राजेंद्र कुमावत की पोस्ट में अपने पिता का उल्लेख स्थानीय भाजपा की राजनीति में खास मायने रखता है। उन्होंने सीधे तौर पर यह सवाल उठाया है कि जिन लोगों ने पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीशचंद्र कुमावत की राजनीतिक विरासत और योगदान को याद किया, क्या उन्होंने उनके परिवार के प्रत्याशी के चुनाव के समय भी उसी भावना के साथ साथ दिया?


भाजपा के लिए अंदरूनी समीकरणों पर सवाल


कुचामन नगर परिषद के चुनाव में भाजपा को 15 पार्षद सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 17 और निर्दलीयों के खाते में 13 सीटें गईं। इसके बाद सभापति पद के चुनाव में भाजपा के महेश रामचंद्रका ने कांग्रेस के आरिफ खान को 25-20 से हराया। वार्ड स्तर पर अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका ने पूरे चुनाव को खासा महत्वपूर्ण बना दिया था।


ऐसे में राजेंद्र कुमावत की पोस्ट को केवल व्यक्तिगत चुनावी हार की प्रतिक्रिया के बजाय भाजपा के भीतर चुनाव के दौरान बने समीकरणों को लेकर उठी एक आवाज के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, किस-किस सभापति उम्मीदवार या उनके समर्थकों ने राजेंद्र को हराने के लिए काम किया, इसका उन्होंने नाम नहीं बताया है और इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।

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