दीपावली पर मिठाई खरीदने से पहले जान लें उसकी ‘मिठास की उम्र’, कौनसी मिठाई कितने दिन तक रहती है ताजा?

बंगाली मिठाइयां 24 घंटे में खोने लगती हैं स्वाद, मावे की मिठाइयों की भी 48 घंटे के बाद घटने लगती है गुणवत्ता, ड्राई फ्रूट मिठाइयों की अपेक्षाकृत ज्यादा होती है शेल्फ लाइफ

डीडवाना-कुचामन। दीपावली का त्योहार हो और घर में मिठाइयों की बात न हो, ऐसा संभव नहीं है। त्योहार के मौके पर बाजारों में मिठाइयों की दुकानों पर रौनक है। कोई रिश्तेदारों के लिए मिठाई खरीद रहा है तो कोई घर आए मेहमानों की खातिरदारी के लिए। लेकिन मिठाई खरीदते समय एक सवाल अक्सर नजरअंदाज हो जाता है कि आखिर कौनसी मिठाई कितने समय तक अपना स्वाद और गुणवत्ता बरकरार रख सकती है? मिठाई खरीदने के बाद उसे कितने समय में इस्तेमाल कर लेना चाहिए और किन मिठाइयों को फ्रिज में रखना जरूरी है?

दीपावली के मौके पर इसी सवाल का जवाब जानने के लिए मिठाई कारोबारियों से बातचीत की गई। बातचीत में सामने आया कि सभी मिठाइयों की शेल्फ लाइफ एक जैसी नहीं होती। मिठाई में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, उसमें नमी की मात्रा, बनाने की प्रक्रिया और उसे रखने का तापमान उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित इस्तेमाल की अवधि तय करते हैं।

बंगाली मिठाइयों को रखना पड़ता है खास देखभाल के साथ

कुचामन शहर के केशु जी स्वीट्स के संचालक गोपाल कुमावत के अनुसार, रस मलाई, छेना रोल, रस माधुरी, रसगुल्ला, राजभोग और सैंडविच जैसी बंगाली मिठाइयों में नमी की मात्रा अधिक होती है।

यही वजह है कि ये मिठाइयां दूसरी मिठाइयों की तुलना में जल्दी गुणवत्ता खोने लगती हैं। उन्होंने बताया कि खरीदने के 24 से लेकर 48 घंटे बाद ही इन मिठाइयों के स्वाद और बनावट में बदलाव महसूस होने लगता है। यदि इन्हें अनुकूल तापमान पर नहीं रखा जाए तो इनके खराब होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

ड्राई फ्रूट मिठाइयों में ज्यादा दिनों तक बरकरार रहती है मिठास

ड्राई फ्रूट से तैयार होने वाली मिठाइयों की बात करें तो काजू कतली, बादाम कतली, काजू-अंजीर कतली, मावा बाइट और ड्राई फ्रूट लड्डू जैसी मिठाइयां अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपनी गुणवत्ता बरकरार रखती हैं। नेमजी स्वीट्स के हरीश कुमावत के मुताबिक, इन मिठाइयों का स्वाद सामान्य परिस्थितियों में एक से सात दिन तक बना रह सकता है।

सर्दियों में अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर कुछ मिठाइयां 10 दिन तक भी अच्छी रह सकती हैं। हालांकि इनकी वास्तविक अवधि सामग्री, नमी और भंडारण के तरीके पर निर्भर करती है।

मावे की मिठाइयों में भी तेजी से बदलती है गुणवत्ता

शहर में कम समय में अपनी मिठाइयों के स्वाद से पहचान बनाने वाली खंडेलवाल स्वीट्स के संचालक अभिमन्यु जोशी बताते हैं कि कलाकंद, मिल्क केक, गुलाब जामुन, काला जामुन, केसर पेड़ा, कलाकंद बर्फी, अखरोट हलवा और गुलकंद बर्फी जैसी मावे से तैयार मिठाइयों की गुणवत्ता भी सीमित समय तक ही बरकरार रहती है।

उनके अनुसार, इन मिठाइयों को तैयार करने के बाद लगभग 48 घंटे तक इस्तेमाल करना बेहतर रहता है। इसके बाद इनके स्वाद और गुणवत्ता में बदलाव आने लगता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्यों जल्दी खराब होती हैं कुछ मिठाइयां?

डीडवाना – कुचामन जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी बाबू लाल चौधरी खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की गाइडलाइन के अनुसार, मिठाइयों की शेल्फ लाइफ उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री, नमी, चीनी और वसा की मात्रा तथा भंडारण के तापमान पर निर्भर करती है। दूध और छेना आधारित मिठाइयों में नमी अधिक होने के कारण उनमें बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक रहती है। इससे मिठाई का स्वाद, गंध, रंग और बनावट प्रभावित हो सकते हैं।


FSSAI की गाइडलाइन में कलाकंद को उसी दिन इस्तेमाल करने योग्य, जबकि रसगुल्ला, रस मलाई और राजभोग जैसी बंगाली मिठाइयों को फ्रिज में रखकर दो दिन के भीतर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। वहीं मिल्क केक और कुछ मावे की मिठाइयों के लिए चार दिन तथा काजू कतली और ड्राई फ्रूट लड्डू जैसी मिठाइयों के लिए सात दिन तक की संकेतात्मक शेल्फ लाइफ बताई गई है। यह अवधि निर्धारित भंडारण परिस्थितियों के अधीन है

मिठाई खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

दीपावली पर मिठाई खरीदते समय सिर्फ स्वाद ही नहीं, उसकी ताजगी और सुरक्षित इस्तेमाल की अवधि का भी ध्यान रखना जरूरी है। FSSAI के निर्देशों के अनुसार, मिठाई की दुकानों पर बिक्री के लिए रखी खुली मिठाइयों की ट्रे या कंटेनर पर बेस्ट बिफोर डेट प्रदर्शित की जानी चाहिए। उपभोक्ताओं को मिठाई खरीदते समय उसकी निर्माण तिथि, इस्तेमाल की अंतिम अवधि और भंडारण संबंधी जानकारी जरूर पूछनी चाहिए।

यानी दीपावली पर मिठाई खरीदते समय सिर्फ यह देखना काफी नहीं कि मिठाई कितनी स्वादिष्ट है, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि उसकी मिठास कितने समय तक बरकरार रहेगी।

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