परबतसर। डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर थाना पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट, पार्ट-टाइम जॉब और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान एक संदिग्ध बैंक खाते में 30 लाख 63 हजार 198 रुपये का संदिग्ध लेन-देन सामने आया है। प्रारंभिक जांच में यह बैंक खाता गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से जुड़ा मिला है। पुलिस का मानना है कि आरोपियों से पूछताछ में एक बड़े संगठित साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारेलाल शिवरान के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र शर्मा तथा वृताधिकारी विक्की नागपाल के सुपरविजन में थाना परबतसर की थानाधिकारी सुमन बुन्देला के नेतृत्व में गठित विशेष पुलिस टीम ने की।
विशेष अभियान में सामने आया संदिग्ध बैंक खाता
राजस्थान पुलिस मुख्यालय एवं जिला पुलिस के निर्देशानुसार साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने यूको बैंक, बिदियाद स्थित एक बैंक खाते की जांच शुरू की। बैंकिंग रिकॉर्ड और साइबर पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह खाता संदिग्ध प्रतीत हुआ।
जांच में सामने आया कि बैंक खाता परमजीत पुत्र जेठाराम निवासी किनसरिया के नाम पर संचालित है। खाते की गतिविधियों का विश्लेषण करने पर पुलिस को कई संदिग्ध लेन-देन मिले। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर जांच की गई, जहां इस खाते से संबंधित तीन साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज मिलीं।

इन शिकायतों में पीड़ितों को सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट, पार्ट-टाइम जॉब और अधिक मुनाफे का लालच देकर रकम ठगने की बात सामने आई। पुलिस ने जब बैंक खाते का विस्तृत वित्तीय विश्लेषण किया तो उसमें 30,63,198 रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिला। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि खाते का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को जमा करने और उसे आगे विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
इसके आधार पर थाना परबतसर में प्रकरण संख्या 81/2026 धारा 318(4), 319(2) भारतीय न्याय संहिता तथा 66-डी आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया।
तकनीकी विश्लेषण से पुलिस पहुंची आरोपियों तक
मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाधिकारी सुमन बुन्देला के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, साइबर पोर्टल, डिजिटल ट्रांजेक्शन, लाभार्थियों की जानकारी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया।
जांच के दौरान संदिग्ध खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों का मिलान किया गया। लगातार तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर पुलिस ने परमजीत पुत्र जेठाराम (32 वर्ष) निवासी किनसरिया और मनीष गर्दा पुत्र दीनाराम गर्दा (23 वर्ष) निवासी खिदरपुरा की पहचान कर उन्हें दस्तयाब किया।

पूछताछ में दोनों की साइबर ठगी में संलिप्तता सामने आने पर उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया।
इस तरह लोगों को फंसाते थे आरोपी
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन और संदेश प्रसारित कर लोगों से संपर्क करते थे। उन्हें कम समय में अधिक मुनाफा, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट, ट्रेडिंग, पार्ट-टाइम जॉब और घर बैठे कमाई जैसे झूठे प्रस्ताव दिए जाते थे।
जब कोई व्यक्ति इनके झांसे में आ जाता था तो उससे अलग-अलग किश्तों में रकम जमा करवाई जाती थी। यह राशि विभिन्न बैंक खातों में प्राप्त कर तुरंत दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दी जाती थी, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी का पता लगाना कठिन हो जाए। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा ठगी की रकम आखिर किन लोगों तक पहुंच रही थी।
कई राज्यों से जुड़े मिले साइबर अपराध के तार
पुलिस जांच में सामने आया है कि संदिग्ध बैंक खाते का उपयोग केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर ठगों द्वारा भी किया गया। जांच के दौरान गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में दर्ज साइबर अपराध की शिकायतों से इस खाते के लिंक मिले हैं।
इसी कारण पुलिस इस मामले को केवल एक बैंक खाते तक सीमित नहीं मान रही है। जांच एजेंसियां अब अन्य राज्यों की पुलिस और साइबर इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

एक आरोपी पहले भी साइबर अपराध में गिरफ्तार
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी मनीष गर्दा का साइबर अपराध से पुराना संबंध रहा है। उसके खिलाफ वर्ष 2025 में भी थाना परबतसर में साइबर अपराध का मामला दर्ज हुआ था। उस प्रकरण में उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान भी पेश किया जा चुका है।
इसके बावजूद उसका दोबारा साइबर अपराध में शामिल होना पुलिस के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पुलिस अब उसके पुराने संपर्कों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है ताकि पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सके।
बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल वॉलेट, सोशल मीडिया अकाउंट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने कितने बैंक खातों का उपयोग किया, किन लोगों के खातों से लेन-देन हुआ और साइबर ठगी से अर्जित धनराशि कहां-कहां भेजी गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र शर्मा ने क्या कहा
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। आधुनिक तकनीकी संसाधनों, डिजिटल विश्लेषण और बैंकिंग रिकॉर्ड की मदद से ऐसे अपराधियों तक पहुंचना अब पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुआ है।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से जुड़े प्रत्येक मामले की गहराई से जांच की जा रही है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारेलाल शिवरान ने क्या कहा
पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारेलाल शिवरान ने आमजन से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट, ट्रेडिंग, पार्ट-टाइम जॉब, टेलीग्राम या व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अधिक मुनाफे का लालच देने वाले किसी भी ऑफर पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी या अन्य गोपनीय जानकारी उपलब्ध नहीं कराएं। साथ ही अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए देना भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल अथवा निकटतम पुलिस थाना की साइबर हेल्प डेस्क पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर ठगी गई राशि को बचाया जा सके।
थानाधिकारी सुमन बुन्देला ने क्या कहा
थानाधिकारी सुमन बुन्देला ने बताया कि इस कार्रवाई में तकनीकी विश्लेषण, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रैकिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष टीम ने लगातार कई दिनों तक बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया, जिसके बाद आरोपियों तक पहुंचना संभव हो सका।

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। उनके बैंक खातों, लेन-देन, मोबाइल डेटा और अन्य सहयोगियों की जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान देशभर में सक्रिय साइबर गिरोहों से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आएंगे।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने इस मामले में परमजीत पुत्र जेठाराम, निवासी किनसरिया, थाना परबतसर तथा मनीष गर्दा पुत्र दीनाराम गर्दा, निवासी खिदरपुरा, थाना परबतसर को गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
कार्रवाई में इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
पूरी कार्रवाई में राजेन्द्र प्रसाद (उपनिरीक्षक), गोपाल राम (उपनिरीक्षक), कमलेश (कांस्टेबल), देवाराम (कांस्टेबल), सोनाथ (कांस्टेबल), भंवरलाल (कांस्टेबल), राजू गुर्जर (कांस्टेबल), राजेन्द्र प्रसाद (कांस्टेबल), भरत सिंह (कांस्टेबल), मनोज कुमार (कांस्टेबल) तथा अंकित शर्मा (कांस्टेबल) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
डीडवाना-कुचामन पुलिस की यह कार्रवाई न केवल जिले में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि साइबर ठग अब छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर देशभर में अपराधों को अंजाम देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने, लालच में न आने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को देने की अपील की है।
