डीडवाना। डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस ने नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) के माध्यम से अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने गिरोह के 21 हजार रुपये के इनामी मुख्य सरगना इमरान अली उर्फ सरजू को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। इससे पहले इसी गिरोह के सदस्य जुबेर आलम, मंसूर आलम और एमडी मुस्ताक को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारेलाल शिवरान ने एसपी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गिरोह ने वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 के दौरान भारत सरकार के नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) में सेंध लगाकर अल्पसंख्यक छात्रों के नाम पर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति का गबन किया। डीडवाना-कुचामन जिले में भी 25 शिक्षण संस्थानों के नाम पर करीब 150 फर्जी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति उठाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया।
तीन थानों में दर्ज हुए थे मामले
इस संबंध में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी गोपाल जीनगर की रिपोर्ट पर डीडवाना थाने में प्रकरण दर्ज कराया गया था । इसके बाद जिले के मकराना और नावां थानों में भी इस तरह के मामले दर्ज किए गए। शिकायत में बताया गया था कि जिले के कुछ शिक्षण संस्थानों के नाम पर संदिग्ध छात्रवृत्ति आवेदन स्वीकृत हुए हैं। जांच में सामने आया कि अज्ञात लोगों ने एनएसपी पोर्टल से छेड़छाड़ कर फर्जी छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति प्राप्त कर ली।
एसआईटी का गठन कर शुरू की गई विशेष जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी डॉ. प्यारेलाल शिवरान ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। टीम ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और साइबर ट्रेल के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।

भेष बदलकर पहुंची पुलिस, चाय बागानों तक की रेकी
जांच के दौरान पुलिस टीम ने कई दिनों तक पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश सीमा से लगे क्षेत्रों में रहकर गोपनीय तरीके से रेकी की। पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान छिपाते हुए स्थानीय लोगों की तरह रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। लगातार तकनीकी निगरानी और मानव खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस गैंग के मुख्य सरगना तक पहुंचने में सफल रही।
ऐसे करता था गैंग करोड़ों की ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले ऐसे शिक्षण संस्थानों की जानकारी जुटाता था जो बंद हो चुके थे या जिन्होंने एनएसपी पोर्टल पर केवाईसी पूरी नहीं की थी। इसके बाद फर्जी विद्यार्थियों के नाम, खरीदे गए बैंक खातों और बदले हुए बैंक विवरण पोर्टल पर अपलोड किए जाते थे।
गिरोह गांवों के गरीब लोगों से सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर बैंक खाते और आधार कार्ड हासिल करता था। कई मामलों में सीएसपी सेंटरों के माध्यम से फर्जी खाते भी खुलवाए जाते थे। छात्रवृत्ति की राशि आने के बाद उसे सीएसपी के जरिए निकालकर गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। स्थानीय स्तर पर सत्यापन कराने के लिए दलालों का भी इस्तेमाल किया जाता था।

भारी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस ने इमरान अली के ठिकानों से 105 विभिन्न कंपनियों के सिम कार्ड, फर्जी मोहरें, शिक्षण संस्थानों की फर्जी रसीदें, क्लोन फिंगरप्रिंट, फिंगरप्रिंट मशीन, मोबाइल पेमेंट टर्मिनल मशीन, कैमरे, लैपटॉप चार्जर तथा चार सिम एक साथ संचालित करने वाला Green Berry G5000 मल्टी-सिम मोबाइल बरामद किया है। पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों का उपयोग साइबर ठगी को अंजाम देने में किया जाता था।
डीडवाना-कुचामन पुलिस की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण साइबर उपलब्धियों में से एक – एसपी डॉ. प्यारेलाल शिवरान
एसपी डॉ. प्यारेलाल शिवरान ने बताया कि यह कार्रवाई डीडवाना-कुचामन पुलिस की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण साइबर उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच, बैंक खातों के विश्लेषण, साइबर ट्रैकिंग और लगातार फील्ड ऑपरेशन के जरिए अंतरराज्यीय गिरोह तक पहुंचना संभव हुआ। उन्होंने बताया कि पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। उन्होंने टीम के सभी अधिकारियों और जवानों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, धैर्य और पेशेवर कार्यशैली के कारण इस बड़े साइबर गिरोह का खुलासा हो सका।

इन अधिकारियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस पूरे प्रकरण में एसपी डॉ प्यारे लाल शिवरान के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु शर्मा (डीडवाना), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विमल सिंह नेहरा (कुचामन) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र शर्मा (परबतसर) के मार्गदर्शन में मामले की जांच और ऑपरेशन का नेतृत्व जेठू सिंह करनोत, आरपीएस, वृत्ताधिकारी, डीडवाना ने किया। RPS जेठू सिंह करनोत ने पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए एसआईटी की रणनीति तैयार की, जांच की दिशा तय की, विभिन्न राज्यों में समन्वय स्थापित किया तथा तकनीकी और मैदानी कार्रवाई का लगातार पर्यवेक्षण किया। उनकी निगरानी में टीम पश्चिम बंगाल तक पहुंचकर मुख्य सरगना की गिरफ्तारी में सफल रही।

इसके साथ ही सुरेश कुमार टेपण, हैड कांस्टेबल 73, साइबर पुलिस थाना डीडवाना,प्रेमचंद अडानियां, हैड कांस्टेबल 99, पुलिस थाना मौलासर,मनोज कुमार, कांस्टेबल 777, पुलिस थाना डीडवाना,गोपाल राम, कांस्टेबल 624, साइबर सेल डीडवाना-कुचामन और श्रीमती निशा कंवर, कांस्टेबल 1072, साइबर सेल डीडवाना-कुचामन का इस पूरे मामले में तकनीकी जांच और साइबर विश्लेषण ,मैदानी कार्रवाई और आरोपियों तक पहुंचने के अभियान , आरोपियों की गतिविधियों पर निगरानी, सूचना संकलन और ऑपरेशन, साइबर सेल के माध्यम से तकनीकी डाटा विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य संकलन और दस्तावेजी जांच, साइबर जांच, डाटा संकलन और तकनीकी समन्वय में उल्लेखनीय योगदान रहा ।
