छोटे से गांव बीजापुर से भारतीय सेना तक: डॉ. सिद्धार्थ बाजिया बने कमीशंड मेडिकल ऑफिसर, बोले— ‘देश सेवा से बड़ा कोई सम्मान नहीं’

छोटे से गांव बीजापुर से भारतीय सेना तक: डॉ. सिद्धार्थ बाजिया बने कमीशंड मेडिकल ऑफिसर, बोले— ‘देश सेवा से बड़ा कोई सम्मान नहीं’

डीडवाना- कुचामन  जिले के बाजिया परिवार के लिए गर्व का पल, कमांड हॉस्पिटल उधमपुर में मिली पहली नियुक्ति

डीडवाना  – कुचामन जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय सेना में कमीशंड मेडिकल ऑफिसर बनने वाले डॉ. सिद्धार्थ बाजिया ने क्षेत्र ही नहीं, पूरे राजस्थान का नाम रोशन किया है। श्रीमती प्रेम देवी बाजिया हॉस्पिटल एवं इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थकेयर साइंसेज, डीडवाना के चेयरमैन एवं वरिष्ठ अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. ईश्वर राम बाजिया के सुपुत्र डॉ. सिद्धार्थ बाजिया भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त कर चुके हैं। उनकी पहली नियुक्ति कमांड हॉस्पिटल, उधमपुर (जम्मू-कश्मीर) में हुई है।

AFMC पुणे में हुई भव्य पासिंग आउट परेड और कमीशन सेरेमनी

महाराष्ट्र के पुणे स्थित आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (AFMC) में एमबीबीएस बैच H3 (60th) वर्ष 2021 की पासिंग आउट परेड एवं कमीशन सेरेमनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डायरेक्टर जनरल आर्म्ड फोर्स मेडिकल सर्विसेज (DGAFMS) वाइस एडमिरल डॉ. आरती सरीन ने परेड की सलामी लेकर सभी नव-नियुक्त सैन्य चिकित्सकों को कमीशन प्रदान किया। इसी दौरान डॉ. सिद्धार्थ बाजिया ने भारतीय सेना में कमीशंड अधिकारी के रूप में शपथ लेकर देश सेवा का संकल्प लिया।

बीजापुरा गांव से सेना तक का प्रेरणादायक सफर

29 नवंबर 2004 को बीजापुरा गांव, तहसील नावा सिटी, जिला डीडवाना-कुचामन में जन्मे डॉ. सिद्धार्थ बाजिया बचपन से ही पढ़ाई और खेलकूद दोनों में उत्कृष्ट रहे। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने निजी चिकित्सा सेवा के बजाय भारतीय सेना में अधिकारी बनकर राष्ट्र सेवा का मार्ग चुना।

उन्होंने वर्ष 2021-22 की NEET परीक्षा उत्कृष्ट रैंक के साथ उत्तीर्ण कर देश के प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे में प्रवेश प्राप्त किया।

पढ़ाई के साथ खेलों में भी रहे अव्वल

AFMC में अध्ययन के दौरान डॉ. सिद्धार्थ ने अकादमिक प्रदर्शन में हमेशा उत्कृष्ट स्थान बनाए रखा। वे कॉलेज की बास्केटबॉल टीम के कप्तान भी रहे और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में AFMC का प्रतिनिधित्व करते हुए कई उपलब्धियां हासिल कीं।

मां का सपना पूरा कर दी सच्ची श्रद्धांजलि

एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान उनकी माता स्वर्गीय श्रीमती प्रेम देवी बाजिया का निधन हो गया। यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर अडिग रहकर उन्होंने अपनी मां का सपना पूरा किया और उनकी स्मृतियों को अपनी सफलता के माध्यम से जीवंत रखा।

चिकित्सा सेवा की समृद्ध पारिवारिक विरासत

डॉ. सिद्धार्थ की बहन डॉ. प्रियंका बाजिया वर्तमान में एमडी रेडियो डायग्नोसिस की पढ़ाई कर रही हैं।  यही नहीं उनके दोनों चाचा और चाचियां भी चिकित्सक हैं ।

उनके चाचा डॉ. सोहनलाल बाजिया शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ तथा डॉ. प्रहलाद राम बाजिया जनरल सर्जन हैं और कुचामन के राजकीय जिला अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं । दादा-दादी सामान्य किसान परिवार से हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य प्रशासन, शिक्षा और इंजीनियरिंग सहित विभिन्न सरकारी सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं –  डॉ. सिद्धार्थ बाजिया 

इस मौके पर डॉ सिद्धार्थ बाजिया ने कहा कि भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना था। यह उपलब्धि केवल मेरी नहीं, बल्कि मेरे माता-पिता, परिवार, शिक्षकों और उन सभी लोगों की है जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया। मैं पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ देश और सैनिकों की सेवा करूंगा। युवाओं से मेरा संदेश है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

डॉ सिद्धार्थ बाजिया के पिता डॉ. ईश्वर राम बाजिया ने  अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण नहीं हो सकता कि उसका बेटा देश की सेना में अधिकारी बनकर राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित हुआ है। सिद्धार्थ ने अपने परिश्रम, अनुशासन और संस्कारों से यह मुकाम हासिल किया है। हमें विश्वास है कि वह भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देकर परिवार, क्षेत्र और देश का नाम रोशन करेगा।

वही डॉ सिद्धार्थ बाजिया के चाचा डॉ. प्रहलाद राम बाजिया ने कहा कि सिद्धार्थ की कामयाबी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं। उसने अपनी माता के सपनों को साकार कर युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

  डॉ. सोहनलाल बाजिया ने कहा कि आज पूरे परिवार के लिए यह ऐतिहासिक और भावुक पल है। सिद्धार्थ की उपलब्धि उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं। अनुशासन, निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

डॉ. सिद्धार्थ बाजिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि छोटे गांव से निकलकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। कठिनाइयों के बीच धैर्य, अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति के बल पर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया है, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उनके भारतीय सेना में कमीशंड अधिकारी बनने पर क्षेत्रभर में खुशी की लहर है और विभिन्न सामाजिक संगठनों, चिकित्सकों एवं गणमान्य नागरिकों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

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