डीडवाना हिंदी पुस्तकालय का होगा सौंदर्यकरण, 110 वर्ष पुरानी धरोहर का मूल स्वरूप रहेगा सुरक्षित । 6 अगस्त को हरिशंकर भाभड़ा जयंती पर विशेष कार्यक्रम व व्याख्यानमाला

डीडवाना। जिला मुख्यालय पर स्थित ऐतिहासिक श्री डीडवाना हिंदी पुस्तकालय के संरक्षण एवं सौंदर्यकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी गई है। पुस्तकालय की मूल पहचान उसके भवन और ऐतिहासिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए इसके सौंदर्यकरण एवं संरक्षण की योजना बनाई गई है। इस संबंध में श्री डीडवाना हिंदी पुस्तकालय चल-अचल संपत्ति ट्रस्ट एवं हिंदी पुस्तकालय व्यवस्था समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में तय किया गया कि वर्ष 1916 में स्थापित इस ऐतिहासिक पुस्तकालय के मूल स्वरूप और ऐतिहासिक भवन में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। सौंदर्यकरण के दौरान भवन की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकें।

यह पुस्तकालय 6 अक्टूबर 1916 को विजयादशमी के पावन अवसर पर स्थापित किया गया था और तब से यह क्षेत्र की साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। पुस्तकालय में आज भी अनेक दुर्लभ एवं प्राचीन ग्रंथ सुरक्षित हैं, जिनमें हरिदास जी की हस्तलिखित लावणी सहित कई महत्वपूर्ण साहित्यिक धरोहरें शामिल हैं।

दुर्लभ ग्रंथों के संरक्षण के लिए बनेंगे विशेष ग्लास बॉक्स

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष ग्लास बॉक्स तैयार किए जाएंगे। इन कार्यों में समाज के प्रबुद्ध नागरिकों एवं आमजन का सहयोग भी लिया जाएगा ताकि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जा सके।

सरकारी अनुदान बहाली के लिए मंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

पुस्तकालय को पूर्व में राज्य सरकार से नियमित अनुदान प्राप्त होता था, लेकिन पिछले लगभग 20 वर्षों से यह अनुदान बंद है। ट्रस्ट एवं व्यवस्था समिति ने निर्णय लिया है कि शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल राजस्थान सरकार के भाषा, कला एवं साहित्य विभाग के मंत्री से मुलाकात कर अनुदान को पुनः शुरू कराने की मांग करेगा।

गौरतलब है कि 2 जनवरी 1983 को राजस्थान सरकार के समाज शिक्षा विभाग, बीकानेर द्वारा इस पुस्तकालय को आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई थी। उस समय प्रदेश के केवल 19 पुस्तकालयों को यह मान्यता प्राप्त थी, जिनमें डीडवाना हिंदी पुस्तकालय भी शामिल था।

देश की अनेक महान विभूतियों के आगमन का है साक्षी

इस ऐतिहासिक पुस्तकालय का गौरवशाली इतिहास देश की अनेक साहित्यिक और राष्ट्रीय विभूतियों की उपस्थिति का साक्षी रहा है। 26 फरवरी 1919 को प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा यहां पहुंची थीं। वहीं 10 अक्टूबर 1973 को प्रख्यात साहित्यकार पंडित हजारी प्रसाद द्विवेदी ने भी पुस्तकालय का दौरा किया था।

पुस्तकालय का हीरक जयंती समारोह 3 अक्टूबर 1992 को आयोजित हुआ था, जिसमें तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। इसके अलावा यहां नियमित रूप से मीरा जयंती, कबीर जयंती और तुलसी जयंती जैसे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन भी होते रहे हैं।

हरिशंकर भाभड़ा जयंती पर होगा भव्य आयोजन

ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय हरिशंकर भाभड़ा की जयंती पर 6 अगस्त को विशेष कार्यक्रम एवं व्याख्यानमाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, शिक्षाविद एवं विभिन्न संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को आमंत्रित करने की योजना है।

ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए पुस्तकालय का होगा आधुनिकीकरण – गोविंद व्यास 

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद व्यास ने बताया कि श्री डीडवाना हिंदी पुस्तकालय केवल एक पुस्तकालय नहीं, बल्कि डीडवाना की सांस्कृतिक, साहित्यिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य भवन का आधुनिकीकरण करने के साथ उसकी ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे नई पीढ़ी के लिए अधिक उपयोगी और आकर्षक बनाना है।

व्यास ने कहा कि पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ ग्रंथ, पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी ताकि समय के साथ इनका नुकसान न हो। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय के विकास, सौंदर्यकरण और ग्रंथ संरक्षण के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग लिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से बंद सरकारी अनुदान को पुनः शुरू कराने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए शीघ्र ही संबंधित मंत्री से मुलाकात कर पुस्तकालय की ऐतिहासिक महत्ता से अवगत कराया जाएगा। व्यास ने विश्वास जताया कि सरकार और समाज के सहयोग से यह पुस्तकालय फिर से साहित्यिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा प्रदेश स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत करेगा।

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