कुचामन सिटी: गांव गोपालपुरा में बुधवार को शीतला माता का पर्व पूरे श्रद्धा, विश्वास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने खेत-खलिहानों और खुले स्थानों पर माता शीतला की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं पूजा की थालियां लेकर पहुंचीं और गांव के खुले स्थान पर एकत्रित होकर शीतला माता को धोक देकर विधिवत पूजा की। इस दौरान दीप प्रज्वलित कर दूध, दही, गुड़ तथा ठंडे भोजन का भोग अर्पित किया गया। महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, बच्चों की लंबी उम्र और गांव-क्षेत्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
पूजा के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी ग्रामीण महिलाओं की आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ग्रामीण अंचलों में शीतला माता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि माता शीतला की आराधना करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और बीमारियों से रक्षा होती है। इसी आस्था और विश्वास के चलते ग्रामीण महिलाएं हर वर्ष पूरे विधि-विधान और परंपरा के साथ यह पूजा करती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता परसाराम बुगालिया ने कहा कि शीतला माता का पर्व ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और आस्था का जीवंत प्रतीक है। गांव की महिलाएं आज भी अपने रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं को पूरी श्रद्धा के साथ निभा रही हैं, जो हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य भी करते हैं।

बुगालिया ने कहा कि ग्रामीण जीवन में महिलाओं की भूमिका हमेशा से संस्कृति और परंपराओं को संजोकर रखने की रही है। आज भी गांवों में महिलाएं श्रद्धा और विश्वास के साथ धार्मिक परंपराओं को निभाकर समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रही हैं, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने माता शीतला से गांव और क्षेत्र में सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और खुशहाली की प्रार्थना की।
