विमल पारीक / कुचामन सिटी में इन दिनों फागोत्सव की रंगीन धूम छाई हुई है। ढोलक की थाप, फाग गीतों की मधुर गूंज और उड़ते अबीर-गुलाल के बीच मंदिर परिसर भक्तिरस में डूबे नजर आ रहे हैं। ब्रज की होली की तर्ज पर कुचामन में भी पारंपरिक अंदाज में फागोत्सव उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।
सीकर रोड स्थित एक निजी भवन में श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव से ओतप्रोत फागोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रंग, फूल और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। जैसे ही ढोलक की थाप बजी और फाग गीतों की स्वर लहरियां वातावरण में घुलीं, पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। उपस्थित श्रद्धालु रंग और भक्ति के इस अद्भुत उत्सव में सराबोर नजर आए।
संगीत सदन व महिला मंडल की सदस्याओं ने जब राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती का स्वरूप धारण कर पारंपरिक फाग खेला तो माहौल भावविभोर हो गया। महिलाओं ने एक-दूसरे पर पुष्पवर्षा कर फूलों की होली खेली, जिससे पूरा परिसर रंग-बिरंगे पुष्पों की सुगंध से महक उठा। अबीर-गुलाल के उड़ते बादलों और जयकारों के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए।

इस अवसर पर महिला मंच की अध्यक्ष बरखा रानी पाटनी ने कहा कि फागोत्सव केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में प्रेम, भाईचारा और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। उन्होंने सभी से अपील की कि त्योहारों को आपसी सौहार्द और मर्यादा के साथ मनाकर समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और सामूहिक रूप से भक्ति गीतों के साथ उत्सव का समापन किया।
