तीन दिवसीय यात्रा में ऐतिहासिक दुर्गों, धार्मिक स्थलों, झीलों और प्राकृतिक धरोहरों का किया अवलोकन, राजस्थान की संस्कृति और स्थापत्य कला को करीब से जाना
लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान, लाडनूं के शिक्षा विभाग की ओर से छात्राध्यापिकाओं के लिए तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के निर्देशन तथा शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ राजस्थान की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहरों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना था। भ्रमण में शामिल 46 छात्राध्यापिकाओं ने चित्तौड़गढ़, उदयपुर और माउंट आबू के प्रमुख दर्शनीय स्थलों का अवलोकन किया।
भ्रमण के प्रथम दिन छात्राध्यापिकाओं ने ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग का अवलोकन किया। दुर्ग के विशाल परिसर, प्राचीन प्रवेश द्वारों, मंदिरों, ऐतिहासिक दीवारों तथा पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी के माध्यम से उन्होंने प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और शिल्प कौशल को समझा। इसके बाद रात्रि में प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में दर्शन किए।

यहां छात्राध्यापिकाओं ने भजन मंडली के साथ नृत्य में भाग लिया तथा मंदिर के बाहर आयोजित गरबा और डांडिया उत्सव का आनंद लिया। इस दौरान उन्हें धार्मिक आस्था और भारतीय लोक संस्कृति की जीवंत परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिला।
भ्रमण के दूसरे दिन छात्राध्यापिकाओं ने झीलों की नगरी उदयपुर का भ्रमण किया। पिछोला झील में नौकायन के दौरान उन्होंने झील के बीच स्थित जग मंदिर और ताज लेक पैलेस के मनोरम दृश्यों का आनंद लिया। इसके बाद रोपवे के माध्यम से करणी माता मंदिर पहुंचकर उदयपुर शहर, अरावली पर्वतमाला और आसपास की झीलों के विहंगम दृश्य देखे। छात्राध्यापिकाओं ने प्रसिद्ध सिटी पैलेस का भ्रमण भी किया और वहां की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य कला तथा सांस्कृतिक महत्त्व की जानकारी प्राप्त की।
तीसरे दिन भ्रमण दल ने राजस्थान के प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू का भ्रमण किया। अरावली पर्वतमाला की प्राकृतिक सुंदरता के बीच छात्राध्यापिकाओं ने अर्बुदा देवी मंदिर, सोमनाथ महादेव मंदिर, अचलेश्वर महादेव मंदिर, गुरु शिखर, देलवाड़ा जैन मंदिर और नक्की झील का अवलोकन किया। इन स्थलों के माध्यम से उन्हें धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य कला और प्राकृतिक पर्यावरण के महत्त्व को समझने का अवसर मिला।

यह तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण छात्राध्यापिकाओं के लिए ज्ञानवर्धक एवं यादगार अनुभव रहा। यात्रा के दौरान उन्होंने राजस्थान के इतिहास, सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक आस्था, स्थापत्य कला और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त किया।
इस भ्रमण दल में कुल 46 छात्राध्यापिकाओं के साथ संकाय सदस्य डॉ. अमिता जैन, सुश्री स्नेहा शर्मा और डॉ. देवी लाल कुमावत भी सहयोगी के रूप में शामिल रहे।
