डीडवाना-कुचामन। निम्बी जोधा थाना क्षेत्र के ग्राम लुकास में हुई लाखों रुपये की सनसनीखेज नकबजनी का पुलिस ने महज 10 दिनों में खुलासा कर दिया। पुलिस ने वारदात में शामिल चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो को भी जब्त किया है। आरोपियों ने रात के अंधेरे में घर की खिड़की की ग्रिल तोड़कर प्रवेश किया और करीब 4 से 5 क्विंटल वजनी लोहे की तिजोरी उठाकर फरार हो गए थे। पुलिस की इस कार्रवाई में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, तकनीकी विश्लेषण, फील्ड इंटेलिजेंस, मुखबिर तंत्र, वैज्ञानिक साक्ष्य और ड्रोन सर्विलांस ने अहम भूमिका निभाई। आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की आठ विशेष टीमें लगातार 10 दिनों तक 24×7 सक्रिय रहीं और राजस्थान के कई जिलों के साथ हरियाणा तक दबिश दी गई।

खिड़की की ग्रिल तोड़कर घर में घुसे, भारी तिजोरी उठाकर ले गए
पुलिस के अनुसार परिवादी गोपालराम पुत्र मेघाराम जाट निवासी लुकास ने रिपोर्ट दर्ज करवाई कि 22 अगस्त 2026 की रात करीब 2 से 4 बजे के बीच अज्ञात बदमाश सफेद रंग की स्कॉर्पियो लेकर उसके मकान के पीछे पहुंचे। बदमाशों ने मकान की खिड़की की लोहे की ग्रिल तोड़ी और अंदर प्रवेश कर लिया। इसके बाद घर में रखी करीब 4 से 5 क्विंटल वजनी लोहे की तिजोरी को उठाकर स्कॉर्पियो में डाल लिया और मौके से फरार हो गए। तिजोरी में करीब 3 लाख 50 हजार रुपये नकद, लगभग 15 भरी सोने के आभूषण, करीब एक किलोग्राम चांदी के आभूषण और नए वाहन की चाबी रखी हुई थी। चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों की कीमत लाखों रुपये बताई गई है और पूरी वारदात में करीब 25 लाख रुपये की चोरी का अनुमान सामने आया।
घटना के तुरंत बाद हरकत में आई पुलिस, एसपी ने खुद संभाली कमान
वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान के निर्देशन में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। एएसपी हिमांशु शर्मा स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और मौका मुआयना किया। घटनास्थल पर एफएसएल और एमओबी टीम को बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए।

इसके बाद वृत्ताधिकारी लाडनूं जितेन्द्र सिंह के नेतृत्व में आठ विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिनमें सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण, आरोपियों के आने-जाने के रूट की पहचान, तकनीकी जांच, फील्ड इंटेलिजेंस, मुखबिर तंत्र के जरिए जानकारी जुटाना और संदिग्धों की धरपकड़ शामिल रही।
500 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज बनी जांच की सबसे बड़ी कड़ी
पुलिस टीमों ने घटनास्थल से लेकर आरोपियों के संभावित भागने के रास्तों तक लगे 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। टोल प्लाजा, होटल, ढाबों, सार्वजनिक स्थानों और रास्तों पर लगे कैमरों की फुटेज को बार-बार देखा गया। अलग-अलग कैमरों से मिले फुटेज को जोड़कर आरोपियों की गतिविधियों का रूट तैयार किया गया। इसके बाद सीसीटीवी से मिले सुरागों का फील्ड स्तर पर सत्यापन किया गया। पुलिस को धीरे-धीरे यह पता चलने लगा कि आरोपी वारदात के बाद किस दिशा में आगे बढ़े और किन-किन इलाकों में रुके।
लुकास से हरियाणा और मेवात तक पहुंचा आरोपियों का रूट
जांच में सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी लुकास से सीकर जिले के खंडेला, उदयपुरवाटी और नीमकाथाना क्षेत्र की ओर गए। इसके बाद उनका मूवमेंट झुंझुनूं जिले के मंडावर, बाबई और खेतड़ी होते हुए हरियाणा के नारनौल, महेंद्रगढ़ और नूंह क्षेत्र तक सामने आया। इसके बाद अलवर के मेवात क्षेत्र में भी उनकी गतिविधियों के इनपुट मिले। आरोपियों ने लगातार अपना रूट बदलकर पुलिस को भ्रमित करने का प्रयास किया। कई जगह ग्रामीण और दूरस्थ रास्तों का इस्तेमाल किया गया, जहां सीसीटीवी कैमरों की सुविधा नहीं थी।
मोबाइल फोन बंद किए, ठिकाने बदलते रहे, फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी काफी शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस से बचने के लिए घटना से पहले और बाद में मोबाइल फोन बंद रखे गए। इसके अलावा आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदलते रहे और वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करते थे। यही वजह रही कि पुलिस के लिए सीधे तौर पर उनकी लोकेशन ट्रेस करना आसान नहीं था। इसके बावजूद साइबर टीम ने घटनास्थल और संभावित रूट से जुड़े तकनीकी डेटा का गहन विश्लेषण किया। संदिग्ध मोबाइल नंबरों को चिन्हित कर उनका सत्यापन किया गया और तकनीकी जानकारी को मानवीय आसूचना एवं फील्ड इंटेलिजेंस से जोड़ा गया।

15 से 20 किलोमीटर के दुर्गम माइनिंग एरिया में ड्रोन से तलाश
जांच के दौरान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती नीमकाथाना क्षेत्र के पहाड़ी और दुर्गम माइनिंग एरिया में आरोपियों की तलाश को लेकर आई। करीब 15 से 20 किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में कई ऐसे स्थान थे, जहां सामान्य पुलिस टीम के लिए पहुंचना मुश्किल था। ऐसे में पुलिस ने ड्रोन टीम की मदद ली। ड्रोन के जरिए संभावित ठिकानों और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी की गई, जबकि जमीनी टीमों ने लगातार दबिश जारी रखी।
नारनौल से मिले इनपुट ने बदली जांच की दिशा
लगातार तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के बीच पुलिस को नारनौल क्षेत्र से आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण इनपुट मिला। इसके बाद पुलिस टीमों ने संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ाई और दबिश की रणनीति तैयार की। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर चारों संदिग्धों को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी की गई। इस तरह 10 दिनों तक चले लगातार अभियान के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
चार शातिर आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में चंद्रपाल उर्फ सी.पी. पुत्र स्वर्गीय सुरेश कुमार, उम्र 29 वर्ष, निवासी गांवडी टीबा वाली ढाणी, थाना नीमकाथाना सदर, जिला सीकर; मुकेश मीणा उर्फ डेढ़ पुटिया पुत्र अमीचंद, उम्र 42 वर्ष, निवासी सांवलपुरा शेखावतान, थाना अजीतगढ़, जिला सीकर; नरेश उर्फ दिनेश मीणा पुत्र रामकिशन मीणा, उम्र 32 वर्ष, निवासी बाजोली, थाना रेणी, जिला अलवर; तथा गौरव डोरिया उर्फ जागा पुत्र बाबूलाल जागा, उम्र 29 वर्ष, निवासी जागा मोहल्ला रेणी, थाना रेणी, जिला अलवर, हाल निवासी सी-35 झेलम अपार्टमेंट, प्रतापनगर, जयपुर को गिरफ्तार किया है।
चोरी, नकबजनी और लूट सहित कई मामलों में रहे हैं आरोपी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी शातिर एवं आदतन अपराधी हैं। इनके खिलाफ राजस्थान के अलग-अलग पुलिस थानों में चोरी, नकबजनी, लूट, डकैती, धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में कई प्रकरण दर्ज रहे हैं। पुलिस अब इनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ इनके सहयोगियों और आपराधिक नेटवर्क की भी जानकारी जुटा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि गिरफ्तार आरोपी पूर्व में किन-किन वारदातों में शामिल रहे हैं।

चोरी का माल बरामद करना अब पुलिस की अगली चुनौती
चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का अगला फोकस चोरी किए गए माल की बरामदगी पर है। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनसे नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, तिजोरी से संबंधित सामग्री और वारदात में इस्तेमाल किए गए अन्य सामान के बारे में पूछताछ कर रही है। साथ ही वारदात में प्रयुक्त स्कॉर्पियो को जब्त कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों से अन्य वारदातों और उनके नेटवर्क को लेकर भी गहन पूछताछ कर रही है।
एसपी डॉ. प्यारे लाल शिवरान ने CO जितेंद्र सिंह, निम्बी जोधा थानाधिकारी रोहिताश किराड़ सहित पूरी टीम की सराहना की
पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान ने इस कार्रवाई में शामिल वृत्ताधिकारी जितेंद्र सिंह , निम्बी जोधा थानाधिकारी रोहिताश किराड़ सहित पूरी पुलिस टीम के प्रयासों की सराहना की है। एसपी के निर्देशन में टीमों ने लगातार 10 दिनों तक बिना रुके 24×7 अभियान चलाया। अलग-अलग जिलों और राज्यों में दबिश देने के साथ सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण, फील्ड इंटेलिजेंस, मुखबिर तंत्र और वैज्ञानिक साक्ष्यों को आपस में जोड़कर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

एसपी ने टीम की मेहनत और बेहतर समन्वय को इस सफलता की महत्वपूर्ण वजह बताया। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पुलिस टीम ने लगातार काम किया और 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने, तकनीकी सुरागों का विश्लेषण करने तथा दुर्गम इलाकों में ड्रोन की मदद से तलाश करने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
इस कार्रवाई में वृत्ताधिकारी लाडनूं जितेन्द्र सिंह, पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी लाडनूं शिम्भू दयाल, पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी जसवंतगढ़ राजेश कुमार, पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी निम्बी जोधा रोहिताश किराड, पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी चितावा सिद्धार्थ प्रजापत, उप निरीक्षक एवं प्रभारी डीएसटी डीडवाना बलदेव, उप निरीक्षक एवं चौकी प्रभारी सुदरासन महावीर प्रसाद, उप निरीक्षक एवं चौकी प्रभारी मिठड़ी फरमान खान तथा सहायक उप निरीक्षक एवं प्रभारी साइबर सेल डीडवाना प्रेमप्रकाश सहित पुलिस टीम की अहम भूमिका रही। पुलिस के अनुसार सभी टीमों के आपसी समन्वय, बेहतर फील्ड इंटेलिजेंस, सूचना संकलन, तकनीकी विश्लेषण और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की संयुक्त रणनीति से यह सफलता हासिल हुई।
फिलहाल पुलिस चारों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। चोरी किए गए माल की बरामदगी, वारदात में इस्तेमाल वाहन एवं अन्य सामान के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इससे पहले कितनी वारदातों को अंजाम दिया और इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
