कुचामन सिटी। नगर परिषद चुनाव 2026 में हॉट सीट माने जा रहे वार्ड नंबर 27 में चुनावी मुकाबला अब सियासी आरोप-प्रत्यारोप के साथ गरमा गया है। भाजपा के प्रमुख दावेदार माने जा रहे कारोबारी महेश रामचंद्रका की अंतिम समय में टिकट कटने और भाजपा की ओर से रवि गट्टाणी को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद रामचंद्रका ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया। अब उन्होंने गुरुवार शाम अपने चुनाव कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने ऊपर कथित दबाव, धमकियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
‘टिकट का आश्वासन दिया, आखिरी वक्त पर काट दिया’
महेश रामचंद्रका ने कहा कि चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले ही वार्डवासियों के समर्थन और अपेक्षाओं को देखते हुए भाजपा के पदाधिकारियों और नेताओं ने उन्हें टिकट देने का आश्वासन दिया था। उनका दावा है कि नामांकन के आखिरी दिन तक भी उनकी टिकट लगभग तय बताई जा रही थी, लेकिन अचानक पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने टिकट काटकर दूसरे व्यक्ति को प्रत्याशी बना दिया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया।
रामचंद्रका का आरोप है कि निर्दलीय नामांकन दाखिल करने के बाद से ही उन पर दबाव बनाने का सिलसिला शुरू हो गया।

‘फॉर्म वापस लेने के लिए धमकाया गया’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामचंद्रका ने दावा किया कि 1 सितंबर से उन पर नामांकन वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि काम बंद करवाने जैसी धमकियां मिलने के बाद उन्हें मजबूर होकर घर से बाहर जाना पड़ा।
रामचंद्रका के मुताबिक, उनके घर पर उस समय उनकी पत्नी और बेटा-बेटी मौजूद थे। इसके बावजूद अलग-अलग समय पर पुलिस घर पहुंचती रही। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो दिनों में करीब 6 बार पुलिस उनके घर पहुंची, कभी दिन में तो कभी रात के समय। उनका आरोप है कि पुलिस ने घर की तलाशी ली और परिजनों से उनके बारे में पूछताछ की।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके एक मित्र के घर तथा डीडवाना में एक रिश्तेदार के घर भी पुलिस भेजी गई।
‘ऊपर तक पहुंच होने का दावा कर दी धमकी’
महेश रामचंद्रका ने पल्लव राय नाम के व्यक्ति पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उक्त व्यक्ति ने अपनी ऊपर तक राजनीतिक पहुंच होने का दावा करते हुए उन्हें बातचीत के लिए दबाव में लेने की कोशिश की। रामचंद्रका के अनुसार उन्हें यह कहते हुए धमकाया गया कि ‘ऊपर से फोन आ रहे हैं, महेश जी बात करना जरूरी है, अन्यथा आपका बड़ा नुकसान हो जाएगा।’

‘मेरे PSO को भी लाइन हाजिर कर दिया’
रामचंद्रका ने अपने PSO को सरकारी दबाव में लाइन हाजिर किए जाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि PSO उनके साथ था और अपनी ड्यूटी कर रहा था, इसके बावजूद उसे लाइन हाजिर कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव कराना है तथा प्रत्येक पात्र व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है। ऐसे में किसी उम्मीदवार पर नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
भाजपा प्रत्याशी पर शिकायत देने का आरोप
रामचंद्रका ने आरोप लगाया कि वार्ड 27 से भाजपा प्रत्याशी रवि गट्टाणी ने उपखंड अधिकारी को शिकायत दी, जिसमें पुराने मुकदमे का हवाला देते हुए उनका नामांकन निरस्त करने की मांग की गई। रामचंद्रका ने कहा कि वह कोई आपराधिक व्यक्ति नहीं हैं और शिकायत के जरिए उनके चुनाव लड़ने के अधिकार को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
‘जनता का समर्थन है, इसलिए टाइगर अभी जिंदा है’
महेश रामचंद्रका ने कहा कि वार्डवासियों का समर्थन उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनका दावा है कि यदि जनता का साथ नहीं होता तो दबाव और डर के चलते उन्हें चुनाव मैदान से बाहर किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि वे भाजपा की विचारधारा में विश्वास रखते हैं, लेकिन इस समय निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जनता के बीच हैं। उन्होंने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। यह जनता की ताकत है, हम न झुकेंगे और न डरेंगे।” रामचंद्रका ने कहा कि वे चुनाव लड़ेंगे और वार्डवासियों के सहयोग से नगर परिषद पहुंचकर विकास तथा आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए काम करेंगे।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने कहा कि उन्हें धमकाने और परेशान करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए वे अपने वकीलों से सलाह ले रहे हैं।

वार्ड 27 में अब मुकाबला सिर्फ टिकट बनाम निर्दलीय की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि महेश रामचंद्रका के इन गंभीर आरोपों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। अब देखना होगा कि उनके आरोपों पर भाजपा और प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और 9 सितंबर के मतदान तक यह सियासी विवाद किस दिशा में जाता है।
