मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी को मिली पीएचडी की उपाधि, देश-विदेश से मिल रही मुबारकबाद
हज़रत सैयद अब्दुर्रज़्ज़ाक़ क़ादरी फ़क़ीर की इल्मी व अदबी ख़िदमात पर किया शोध, मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी जोधपुर से हासिल की डॉक्टरेट
शेरानी आबाद। प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान, लेखक और वक्ता डॉ. मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी ने एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर के उर्दू विभाग से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने वर्ष 2022 में “हज़रत सैयद अब्दुर्रज़्ज़ाक़ क़ादरी फ़क़ीर (1888–1953) की इल्मी व अदबी ख़िदमात” विषय पर शोध के लिए पंजीकरण कराया था। करीब चार वर्षों की मेहनत और शोध के बाद सफल वाइवा के साथ उन्होंने यह डिग्री हासिल की।

पहली बार अकादमिक तौर पर सामने आया महत्वपूर्ण शोध
डॉ. ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने अपने शोध में हज़रत सैयद अब्दुर्रज़्ज़ाक़ क़ादरी फ़क़ीर के जीवन, उनकी इल्मी सोच और अदबी योगदान का विस्तार से अध्ययन किया है। वर्ष 1953 में उनके इंतकाल के सात दशक से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद उनके व्यक्तित्व और साहित्यिक सेवाओं पर यह पहला पीएचडी शोध बताया जा रहा है। इस शोध के माध्यम से उनके जीवन और साहित्य से जुड़े कई अहम पहलू व्यवस्थित रूप से अकादमिक दुनिया के सामने आए हैं।
डॉ. अज़ीज़ुल्लाह शेरानी की निगरानी में पूरा हुआ शोध
यह शोध कार्य मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर के उर्दू विभाग के वरिष्ठ विद्वान डॉ. अज़ीज़ुल्लाह शेरानी के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। शोध के दौरान विभिन्न स्रोतों, साहित्यिक सामग्री और उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन कर विषय को अकादमिक रूप में प्रस्तुत किया गया। सफल वाइवा के बाद डॉ. मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

देश ही नहीं, विदेशों से भी मिल रही मुबारकबाद
पीएचडी की उपाधि मिलने की खबर सामने आने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी उन्हें मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हो गया। उलमा, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और उनके चाहने वालों ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआएं कीं।
दो दर्जन से ज्यादा किताबों के लेखक हैं डॉ. ख़ालिद
डॉ. मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी का उर्दू अदब और समाजी विषयों से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वे राजस्थान उर्दू अकादमी के पूर्व सदस्य भी रह चुके हैं। उर्दू भाषा में उनकी दो दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा वे अलग-अलग समय में उर्दू और हिंदी में प्रकाशित होने वाली साहित्यिक पत्रिका “एहसास” के संपादन और प्रकाशन से भी जुड़े रहे हैं।

समाज सुधार और राष्ट्रीय एकता पर भी देते हैं जोर
डॉ. ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी को समाज सुधार, राष्ट्रीय एकता, नैतिक जागरण और इस्लामी विषयों पर प्रभावशाली तकरीरों के लिए भी जाना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रमों में उन्हें व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया जाता रहा है।
” सबका साथ होने से मिली कामयाबी ” — डॉ. ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही
पीएचडी की उपाधि मिलने पर डॉ. ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी ने अल्लाह तआला का शुक्र अदा करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए खुशी और शुक्र का मौका है। उन्होंने कहा कि यह काम केवल उनकी व्यक्तिगत कामयाबी नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनके माता-पिता की दुआएं, परिवार का त्याग, शिक्षकों की रहनुमाई और साथियों का सहयोग शामिल है। उन्होंने अपने तमाम शिक्षकों, परिवारजनों और सहयोगियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उनकी हौसला-अफ़ज़ाई ने इस लंबे शोध सफर को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।

“ख़ालिद अय्यूब की कामयाबी युवाओं के लिए मिसाल” — डॉ. अख़लाक़ अहमद उस्मानी
वरिष्ठ पत्रकार, मोटिवेशन गुरु और इस्लामिक मामलों के जानकार डॉ. अख़लाक़ अहमद उस्मानी ने डॉ. मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी को पीएचडी की उपाधि हासिल करने पर मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि “इल्म हासिल करने का सफर कभी खत्म नहीं होता और डॉ. ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने अपने शोध के जरिए न सिर्फ एक अहम शख्सियत की इल्मी व अदबी ख़िदमात को सामने लाया है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपने इतिहास और अदब से जुड़ने का रास्ता दिखाया है। उनकी यह कामयाबी युवाओं के लिए मेहनत, लगन और लगातार सीखते रहने की एक अच्छी मिसाल है।”

डॉ. उस्मानी ने कहा कि डॉ. ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने लेखन, अदब, समाज सुधार और इल्मी गतिविधियों के जरिए लंबे समय से अपनी अलग पहचान बनाई है। पीएचडी की यह उपलब्धि उनके इल्मी सफर में एक और अहम पड़ाव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी वे इसी तरह उर्दू अदब, इल्म और समाजी जागरूकता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे।

चार साल की मेहनत के बाद हासिल हुई कामयाबी
चार साल तक चले इस शोध सफर का सफल वाइवा के साथ समापन हुआ। पीएचडी की उपाधि हासिल करने के बाद डॉ. मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी को लगातार मिल रही मुबारकबाद उनके इल्मी और अदबी सफर में हासिल इस उपलब्धि की अहमियत को दर्शाती है।
