“कुर्सी गई, रुतबा नहीं!… सरकारी कार्यक्रमों में ‘पूर्व’ अब भी ‘वर्तमान’, कांग्रेस ने उठाए प्रशासन पर सवाल”
नगर कांग्रेस अध्यक्ष सुतेन्द्र सारस्वत बोले— मंत्री और भाजपा के दबाव में प्रशासन, लोकतंत्र नहीं ‘पसंदीदा सूची’ से चल रहे हैं निमंत्रण
कुचामन सिटी। सरकारी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को लेकर प्रशासन की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर कांग्रेस कमेटी कुचामन सिटी के अध्यक्ष सुतेन्द्र सारस्वत ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में नगर निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल समाप्त हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासन आज भी भाजपा समर्थित निवर्तमान जनप्रतिनिधियों को मानो वर्तमान पदाधिकारी मानकर सरकारी और अर्द्धसरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित कर रहा है।

वहीं कांग्रेस से जुड़े पूर्व जनप्रतिनिधियों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। सारस्वत ने कहा कि यदि किसी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उसे उसी पद के अनुरूप सम्मान और सरकारी निमंत्रण दिया जा रहा है तो यही अधिकार अन्य सभी पूर्व पंच, सरपंच, प्रधान, सभापति, उपसभापति और जनप्रतिनिधियों को भी मिलना चाहिए। केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर चयन करना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
उन्होंने 15 अगस्त के प्रस्तावित स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए कुचामन उपखंड कार्यालय से जारी आमंत्रण पत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें “सभापति, नगर परिषद” का उल्लेख किया गया है, जबकि नगर परिषद का बोर्ड कई माह पहले ही समाप्त हो चुका है और वर्तमान में उपखंड अधिकारी स्वयं प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं। ऐसे में समाप्त हो चुके पद का उल्लेख करना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सारस्वत ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक, जो प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं, तथा भाजपा के दबाव में प्रशासनिक अधिकारी काम कर रहे हैं। इसी दबाव के चलते कार्यकाल पूरा कर चुके भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों को आज भी उसी पद से नवाजा जा रहा है और सरकारी कार्यक्रमों में उसी हैसियत से बुलाया जा रहा है। जबकि अन्य पूर्व जनप्रतिनिधियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “अगर कुर्सी खत्म हो चुकी है तो उसका सरकारी इस्तेमाल भी खत्म होना चाहिए। और यदि पूर्व पदाधिकारियों को बुलाना ही है तो सभी दलों के पूर्व जनप्रतिनिधियों को समान सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए। लोकतंत्र में सरकारी मंच किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं हो सकते।”
नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रशासन से इस कथित भेदभावपूर्ण व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने और भविष्य में सभी पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकारी कार्यक्रम राजनीतिक पक्षपात का माध्यम बने रहे तो कांग्रेस इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगी।
