नाबालिग की फोटो एडिट कर अश्लील बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में चचेरी बहन को 3 साल की सजा, ₹1.25 लाख का जुर्माना

डीडवाना। नाबालिग बालिका की फोटो एडिट कर उसे अश्लील स्वरूप में बदलकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में डीडवाना की पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी चचेरी बहन को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के साधारण कारावास और कुल 1 लाख 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश नाहर सिंह मीणा ने मामले की सुनवाई करते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों, एफएसएल रिपोर्ट तथा गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए दोषी को अधिकतम 3 वर्ष का कारावास भुगतना होगा।


यह मामला पुलिस थाना डीडवाना में दर्ज एफआईआर संख्या 311/2021 से संबंधित है। अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) बीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष 28 दस्तावेज और 12 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। मामले में एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण साक्ष्य रही, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।

निर्णय के बाद विशिष्ट लोक अभियोजक बीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि यह फैसला डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर बच्चों एवं महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों के लिए कड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, एफएसएल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर अपराध को सफलतापूर्वक सिद्ध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी पैरवी से पीड़ितों को न्याय मिलने के साथ समाज में कानून के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है।

इन धाराओं में सुनाई गई सजा

धारा 509 आईपीसी (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना):
2 वर्ष का साधारण कारावास
₹10,000 का जुर्माना
जुर्माना अदा नहीं करने पर 1 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास।


धारा 201 आईपीसी (साक्ष्य मिटाना/नष्ट करना):
2 वर्ष का साधारण कारावास
₹5,000 का जुर्माना
जुर्माना अदा नहीं करने पर 1 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास।


धारा 67(क)/(ख) आईटी एक्ट (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रकाशन/प्रसारण):
3 वर्ष का साधारण कारावास
₹1,00,000 का जुर्माना
जुर्माना अदा नहीं करने पर 6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास।


धारा 11/12 पॉक्सो एक्ट:
3 वर्ष का साधारण कारावास
₹10,000 का जुर्माना
जुर्माना अदा नहीं करने पर 1 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास।

न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ (Concurrent) चलेंगी, इसलिए दोषी को अधिकतम 3 वर्ष का साधारण कारावास भुगतना होगा तथा कुल ₹1,25,000 का अर्थदंड अदा करना होगा।

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