जेल से रिहाई के बाद हनुमान बेनीवाल से मिले रामनिवास पोषक, लिया आशीर्वाद; बोले- संघर्ष और मजबूती से जारी रहेगा
काला झंडा प्रकरण के बाद पहली बड़ी राजनीतिक मुलाकात, संगठनात्मक मजबूती और जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को कुचामन सिटी में काले झंडे दिखाने के चर्चित प्रकरण के बाद महज 14 दिन में 6 मुकदमे झेलने के बाद जमानत मिलने पर नावां विधानसभा क्षेत्र के राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) नेता रामनिवास पोषक ने नागौर सांसद एवं आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल से मुलाकात की । इस दौरान पार्टी के कई युवा कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
जेल से रिहा होने के बाद हुई इस मुलाकात को आरएलपी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में काला झंडा प्रकरण को लेकर प्रदेशभर में चर्चा के बीच पोषक का सीधे पार्टी सुप्रीमो से मिलना संगठन के भीतर एकजुटता का संदेश माना जा रहा है।
संघर्ष के साथियों के साथ पहुंचे पोषक
रामनिवास पोषक ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने हनुमान बेनीवाल से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर संघर्ष के दौरान साथ रहे रमेश कलकला, विकास जाखड़, महेंद्र श्योर, सुरेश सेवदा, अंकित बुगालिया और दिनेश चौधरी भी मौजूद रहे।
मुलाकात के दौरान कार्यकर्ताओं ने हालिया घटनाक्रम, संगठनात्मक गतिविधियों और क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की।

बेनीवाल ने बढ़ाया कार्यकर्ताओं का मनोबल
सूत्रों के अनुसार मुलाकात के दौरान हनुमान बेनीवाल ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित के मुद्दों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को किसी प्रकार के दबाव से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।
बेनीवाल ने कहा कि आरएलपी हमेशा किसानों, युवाओं, बेरोजगारों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी लड़ती रहेगी।
रामनिवास पोषक बोले- संघर्ष जारी रहेगा
मुलाकात के बाद रामनिवास पोषक ने कहा कि कठिन परिस्थितियों और लगातार कानूनी चुनौतियों के बावजूद उनका मनोबल कमजोर नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सहयोग ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया है।
पोषक ने कहा कि युवाओं, किसानों और आम जनता के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका संघर्ष पहले की तरह जारी रहेगा तथा जनहित के मामलों में वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी मुलाकात
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि काला झंडा प्रकरण के बाद हुई यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि संगठनात्मक एकजुटता का सार्वजनिक संदेश भी है। हाल के दिनों में आरएलपी लगातार इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और जनसंघर्ष से जोड़कर उठा रही है।

क्या है पूरा काला झंडा प्रकरण?
गौरतलब है कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान आरएलपी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए काले झंडे दिखाए थे। इसके बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए और कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की। इस प्रकरण में रामनिवास पोषक भी आरोपी बनाए गए थे।
पोषक को हाल ही में दर्ज छह मुकदमों में जमानत मिली है। जमानत के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में पुलिस और सरकार पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने के आरोप लगाए थे। वहीं उनके पिता प्रभुराम पोषक ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट, मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को शिकायत भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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