कुचामन सिटी। हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं दिव्य लीलाओं का रसपान कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास, राष्ट्रवादी विचारक एवं परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज (जयपुर) ने श्रीकृष्ण की अलौकिक बाल लीलाओं, गोप-गोपियों के साथ उनके प्रेममय व्यवहार तथा गोवर्धन लीला का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया।

कथा के दौरान महाराज श्री ने नंदलाल की माखन चोरी, यशोदा मैया के वात्सल्य, ग्वाल-बालों के साथ खेलकूद तथा वृंदावन की विभिन्न बाल लीलाओं का ऐसा जीवंत चित्रण किया कि श्रद्धालु स्वयं को द्वापर युग के उस दिव्य वातावरण में अनुभव करने लगे। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु कृष्ण भक्ति के रंग में रंगे नजर आए।
कथा का प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करने की भव्य झांकी रही। सुंदर सजावट, आकर्षक प्रस्तुति और भक्तिमय वातावरण के बीच जैसे ही गोवर्धन लीला का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल “गिरिराज धरण की जय” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भगवान के दर्शन किए और भक्ति रस में डूब गए।

अपने प्रवचन में आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज ने कहा कि गोवर्धन लीला केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, अहंकार के त्याग और ईश्वर पर अटूट विश्वास का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को समाप्त कर यह बताया कि शक्ति का उपयोग लोककल्याण के लिए होना चाहिए, अहंकार के लिए नहीं।
महाराज श्री ने कहा कि आज के दौर में मनुष्य भौतिक सुखों की दौड़ में आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है। श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, सेवा, करुणा, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में भक्ति के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

आयोजक सुखाराम कड़वा (गुरु कृपा प्रॉपर्टीज) ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि कथा के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कथा स्थल पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि समाज आज भी धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पित है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कथा के आगामी दिनों में भगवान श्रीकृष्ण की अन्य दिव्य लीलाओं, महारास, सुदामा चरित्र एवं भक्ति के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से परिवार सहित कथा में उपस्थित होकर धर्म एवं संस्कृति के इस महायज्ञ का लाभ लेने का आग्रह किया।

गौरतलब है कि हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित यह नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ लगातार श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इससे पूर्व कथा के दौरान नरसिंह अवतार, गजेन्द्र मोक्ष, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव चरित्र, महाराज भरत, वामन अवतार, श्रीराम जन्म एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव जैसे दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया जा चुका है। प्रतिदिन सजाई जा रही आकर्षक धार्मिक झांकियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
कथा के समापन पर महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
