राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद प्रधानाचार्य (रेसा-पी) ने पदोन्नत प्रधानाचार्यों की चयन तिथि अंकन लंबित रहने पर शिक्षा निदेशालय के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी सात दिनों में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 8 जून 2026 को शिक्षा निदेशालय बीकानेर पर एक दिवसीय धरना, घेराव और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन से आमरण अनशन और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

संघ के अतिरिक्त महामंत्री डॉ. दिलीप कुमार पारीक ने बताया कि माननीय शिक्षा मंत्री के निर्देशों और शासन स्तर से जारी आदेशों के बावजूद सत्र 2015-16 से 2019-20 तक पदोन्नत प्रधानाचार्यों की पदोन्नति तिथि अंकन की प्रक्रिया आज तक लंबित है। उन्होंने कहा कि निदेशालय माध्यमिक शिक्षा बीकानेर की लापरवाही के कारण हजारों प्रधानाचार्य अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं।
उन्होंने बताया कि सत्र 2017-18 में पदोन्नत हुए केवल 1970 प्रधानाचार्यों की पदोन्नति तिथि 01 अप्रैल 2017 अंकित करने के आदेश वर्ष 2022 में जारी किए गए थे, जबकि शेष लगभग 8000 प्रधानाचार्य अब तक चयन तिथि अंकन से वंचित हैं। इनमें प्रधानाध्यापक और प्राध्यापक पद से पदोन्नत अधिकारी शामिल हैं। संगठन का आरोप है कि कुछ कार्मिकों को लाभ देकर बाकी को लंबित रखना निदेशालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

डॉ. दिलीप कुमार पारीक ने कहा कि सरकार की मंशा और सचिव स्तर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निदेशालय के कार्मिकों द्वारा चयन तिथि अंकन नहीं किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा तथा निदेशालय स्तर पर आमरण अनशन तक किया जाएगा।
जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह चारण और जिला मंत्री जयनारायण रैगर ने बताया कि राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा 05 मई 2026 को जारी परिपत्र और माध्यमिक शिक्षा निदेशक के 22 मई 2026 के आदेश के तहत विभागीय कार्मिकों के वेतन निर्धारण की पुनः जांच की जानी है। ऐसे में चयन तिथि अंकन नहीं होने से प्रधानाचार्य वर्ग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
