50 साल बाद फिर सजी मित्रों की महफ़िल : बांगड़ कॉलेज के पूर्व छात्रों ने गुरुजनों को किया नमन
भागदौड़ भरी इस जिंदगी में इंसान धन, करियर और पहचान की तलाश में देश-विदेश तक चला जाता है। कोई व्यापार में रमता है, कोई सामाजिक या राजनीतिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाता है, लेकिन जो अपनी मातृभूमि और बचपन के सखा-संगियों को नहीं भूलता, वही सच में भाग्यशाली कहलाता है। ऐसी ही मिसाल पेश की डीडवाना नगर के राजकीय बांगड़ कॉलेज के वर्ष 1975-76 के विद्यार्थियों ने।करीब 50 वर्ष पहले कॉलेज की दहलीज पार करने वाले 40 मित्र आज भी हर साल एक बार मिलते…
