नगर परिषद के विकास कार्यों पर सियासी बवाल: कांग्रेस के भ्रष्टाचार के आरोपों पर भाजपा ने कहा — “एक रुपए का भी घोटाला नहीं”
कुचामन नगर परिषद में विकास कार्यों और टेंडरों को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। एक दिन पहले कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए करोड़ों के घोटालों और संदिग्ध भुगतानों के आरोपों के बाद अब भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर ही भ्रष्टाचार, गुटबाजी और जनता को गुमराह करने के आरोप जड़ दिए हैं। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सियासी संग्राम अब खुलकर सामने आ गया है।

कुचामन नगर परिषद के निवर्तमान सभापति सुरेश सिखवाल और भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष बाबूलाल कुमावत ने संयुक्त प्रेस नोट जारी कर कांग्रेस नेताओं के आरोपों को “झूठ, अनर्गल प्रलाप और राजनीतिक बौखलाहट” करार दिया। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि नगर परिषद में “एक रुपए का भी भ्रष्टाचार नहीं हुआ” और पिछले ढाई वर्षों में हुए सभी विकास कार्य पूरी पारदर्शिता, सरकारी नियमों और तकनीकी मापदंडों के तहत करवाए गए हैं।
भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी के मार्गदर्शन में कुचामन में पहली बार बिना भेदभाव सभी वार्डों में विकास कार्य हुए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस शासन के दौरान केवल “अपने चहेते वार्डों” को प्राथमिकता दी जाती थी, जबकि भाजपा बोर्ड ने हर वार्ड में समान रूप से सड़क, नाली और धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए राशि स्वीकृत की।

प्रेस नोट में भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि एलएंडटी और रूडिप द्वारा पूर्व में केवल पेचवर्क किया गया था, जिसके बाद कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। ऐसे में आमजन और वाहन चालकों की सुविधा के लिए दोबारा सड़क निर्माण आवश्यक था। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि स्थानीय व्यापारियों और आमजन ने नगर परिषद द्वारा करवाए जा रहे सीमेंट सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की सराहना भी की है।
सुरेश सिखवाल ने कांग्रेस बोर्ड में रहे सभापति और उपसभापति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “दूसरों पर कीचड़ उछालने वाले खुद शीशे के घरों में रहते हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बोर्ड का पूरा कार्यकाल “काले कारनामों और भ्रष्टाचार” से भरा रहा, जिसके चलते सरकार को सभापति और उपसभापति को निलंबित करना पड़ा। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि कांग्रेस के कई नेता न्यायिक जांच के घेरे में हैं और जनता अब उनके “भ्रामक प्रचार” को समझ चुकी है।
भाजपा ने कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर भी हमला बोला। प्रेस नोट में कहा गया कि स्थानीय कांग्रेस गुटबाजी और धड़ेबाजी से बिखर चुकी है और उसके नेता अपनी “डूबती राजनीतिक नैया” बचाने के लिए रोज नए आरोपों का सहारा ले रहे हैं। भाजपा ने कहा कि उनका एकमात्र संकल्प कुचामन का विकास है और विपक्ष चाहे जितने आरोप लगाए, विकास कार्य रुकने वाले नहीं हैं।
दरअसल यह पूरा विवाद कांग्रेस नेताओं हेमराज चावला और नगर कांग्रेस अध्यक्ष सुतेंद्र सारस्वत के एक दिन पहले जारी संयुक्त प्रेस नोट के बाद शुरू हुआ। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि नगर परिषद क्षेत्र में पिछले दो ढाई वर्षों में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपए के संदिग्ध भुगतान उठाए गए हैं और लगभग 70 करोड़ रुपए के टेंडरों में अनियमितताओं की आशंका है।

कांग्रेस का दावा था कि कांग्रेस बोर्ड के कार्यकाल में ही एलएंडटी और रूडिप परियोजना के तहत शहर के लगभग 30 वार्डों में सड़क, सीवरेज और पेयजल संबंधी कार्य पूरे हो चुके थे। ऐसे में उन्हीं क्षेत्रों में दोबारा विकास कार्य दिखाकर भुगतान उठाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच पूरी होने तक भुगतानों पर रोक लगाने की मांग भी उठाई थी।

अब कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा के पलटवार के बाद कुचामन की राजनीति में नगर परिषद के विकास कार्य और टेंडर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गए हैं। दोनों दल एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार और जनता को गुमराह करने के आरोप लगा रहे हैं, जबकि शहर की सियासत में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्माने के संकेत दे रहा है।
