फेसबुक पर शेयर मार्केट में मोटे मुनाफे का झांसा देकर डेल्टा एल्गो ऐप के जरिए की थी ठगी, वाराणसी से लखनऊ तक पीछा कर आरोपियों तक पहुंची पुलिस
डीडवाना-कुचामन। साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत डीडवाना-कुचामन जिला साइबर पुलिस ने ऑनलाइन शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 61 लाख रुपये से अधिक की ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गैंग का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर फर्जी निवेश ऐप के जरिए पीड़ित को अधिक मुनाफे का लालच देकर 61 लाख 50 हजार 47 रुपये की ठगी करने का आरोप है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के लेन-देन के संबंध में जानकारी जुटा रही है।
जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु शर्मा के सुपरविजन तथा साइबर थाना प्रभारी भानु प्रताप सिंह राठौड़ के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।
फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुई ठगी
पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर 2026 को परिवादी सुनील कुमार ने साइबर हेल्पलाइन पोर्टल 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी ने बताया कि फेसबुक पर शेयर मार्केट में निवेश कर अच्छा मुनाफा कमाने का विज्ञापन देखकर वह आरोपियों के संपर्क में आया। इसके बाद उसे व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़कर मोटे मुनाफे का लालच दिया गया और डेल्टा एल्गो ऐप डाउनलोड करवाया गया।
ऐप पर निवेश की गई राशि और कथित मुनाफा दिखाई देने के कारण परिवादी को भरोसा हो गया। इसके बाद उसने अलग-अलग चरणों में कुल 61,50,047 रुपये निवेश कर दिए। जब उसने अपनी रकम निकालने का प्रयास किया तो वह ऐसा नहीं कर सका। ठगी का पता चलने पर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

इस संबंध में साइबर थाना डीडवाना-कुचामन में प्रकरण संख्या 28/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66डी में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
बैंक खातों की जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने बैंक खातों के विवरण, लेन-देन और साइबर तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि परिवादी से ठगी गई रकम में से 43 लाख रुपये विपिन कुमार के खाते में डाले गए थे। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पीछा करते हुए उसे वाराणसी से गिरफ्तार किया।
पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने प्रशांत पाठक को भी वाराणसी से गिरफ्तार किया। जांच में खाता उपलब्ध कराने और आगे दूसरे लोगों तक पहुंचाने की भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों की मदद से अलग-अलग शहरों में आरोपियों की तलाश की और लखनऊ से दीपक कुमार उर्फ अरमान सिंह तथा उसके सहयोगी मोहम्मद रिजवान खान को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे। कोई बैंक खाते उपलब्ध करवाता था, तो कोई खाताधारकों को अपने संपर्क में रखकर ठगी की रकम का लेन-देन करवाता था। मामले में आगे की जांच जारी है।
इस तरीके से देते थे साइबर ठगी को अंजाम
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य फेसबुक पर शेयर मार्केट में निवेश के विज्ञापन दिखाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। संपर्क करने वाले लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर डेल्टा एल्गो ऐप डाउनलोड करवाया जाता था। शुरुआत में कम रकम निवेश करवाकर ऐप पर कथित लाभ दिखाया जाता था, ताकि पीड़ित का विश्वास जीत सकें। इसके बाद बड़ी रकम निवेश करवाई जाती थी।
गिरोह के सदस्य ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए अलग-अलग बैंक खातों की व्यवस्था करते थे। खाताधारकों को कमीशन देने का लालच देकर अपने संपर्क में रखा जाता था और उन्हें अलग-अलग शहरों के होटलों में ठहराने की बात भी जांच में सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम खातों में आने के बाद उसे यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदलने और फिर अन्य खातों के माध्यम से आगे भेजने का तरीका अपनाया जाता था। गिरोह के अलग-अलग सदस्य अपने हिस्से का कमीशन लेकर काम करते थे। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की भूमिका और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने मामले में विपिन कुमार सिंह, उम्र 35 वर्ष, निवासी ग्राम जजाला नगरा, जिला बलिया, उत्तर प्रदेश, हाल निवासी चांदमारी, वाराणसी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, वह कथित तौर पर फर्म तैयार कर बैंक खाते उपलब्ध करवाने और कमीशन लेने की भूमिका में था।
दूसरा आरोपी प्रशांत पाठक, उम्र 34 वर्ष, निवासी भीटी, रामनगर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश है। उस पर गिरोह के लिए बैंक खाते प्राप्त करने और आगे उपलब्ध करवाने में भूमिका निभाने का आरोप है।
तीसरा आरोपी दीपक कुमार उर्फ अरमान सिंह, उम्र 34 वर्ष, मूल निवासी करपी बाजार, जिला अरवल, बिहार, हाल निवासी मटकुरिया, धनबाद, झारखंड है। पुलिस के अनुसार, वह गिरोह की दूसरी शाखा का कथित प्रमुख था और खाताधारकों के प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था।
चौथा आरोपी मोहम्मद रिजवान खान, उम्र 27 वर्ष, निवासी फुसबंगला, झरिया, जिला धनबाद, झारखंड है। उस पर गिरोह की दूसरी शाखा में सहायक की भूमिका निभाने का आरोप है।
एसपी डॉ. प्यारे लाल शिवरान ने ये कहा
जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान ने कहा कि साइबर अपराधियों के विरुद्ध पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

आमजन को साइबर ठगी से बचाने के लिए जागरूकता के साथ-साथ ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सोशल मीडिया पर शेयर मार्केट में असामान्य मुनाफे का लालच देने वाले विज्ञापनों पर भरोसा न करें और किसी भी अनजान ऐप के माध्यम से निवेश करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें।
साइबर थानाधिकारी और RPS भानु प्रताप सिंह राठौड़ के नेतृत्व में कार्रवाई
साइबर थाना प्रभारी RPS भानु प्रताप सिंह राठौड़ के नेतृत्व में गठित टीम ने बैंक खातों के विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों का पता लगाया। कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने वाराणसी और लखनऊ तक जांच का दायरा बढ़ाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।

राठौड़ ने बताया कि मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस का प्रयास है कि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, ठगी की रकम के अंतिम लाभार्थियों और इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जानकारी जुटाकर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाए।
इस पुलिस टीम की रही भूमिका
इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी भानु प्रताप सिंह राठौड़, पुलिस निरीक्षक सतपाल सिंह, हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार टेपण, कांस्टेबल ताराचंद, कांस्टेबल सुगाराम, कांस्टेबल हरिराम, कांस्टेबल सुखाराम तथा साइबर सेल के कांस्टेबल तुलछीराम और कांस्टेबल गोपालराम शामिल रहे।इनमें से सतपाल सिंह, सुरेश कुमार टेपण, ताराचंद और सुगाराम का कार्रवाई में विशेष योगदान रहा।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर मिलने वाले अनजान लिंक, ऐप और सोशल मीडिया विज्ञापनों से सावधान रहें। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के प्रयास किए जा सकें।
