मकराना। मकराना की बंद पड़ी 203 खदानों का मुद्दा अब उच्चाधिकार प्राप्त समिति (हाई पावर कमेटी) के समक्ष पहुंच गया है। अजमेर के जवाहर रंगमंच में रविवार को आयोजित अरावली पॉलिगॉन जनसुनवाई में मकराना के खानधारकों और जनप्रतिनिधियों ने बंद खदानों से जुड़े गंभीर मुद्दों को मजबूती से उठाते हुए खनन गतिविधियों को फिर से शुरू कराने की मांग रखी।
मकराना की करीब 203 खदानें अरावली पॉलिगॉन जोन में शामिल होने के कारण लंबे समय से बंद हैं। खानधारकों का कहना है कि खदानों को अरावली पॉलिगॉन क्षेत्र में शामिल करने के पीछे किए गए सर्वे में वास्तविक परिस्थितियों का सही आकलन नहीं किया गया। इसी को लेकर जनसुनवाई में मकराना क्षेत्र का पुनः सही एवं वास्तविक सर्वे करवाने की मांग प्रमुखता से रखी गई।

विधायक गैसावत ने पुरजोर तरीके से उठाया मकराना माइंस का मुद्दा
जनसुनवाई में मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत, मकराना व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं अधिवक्ता शुभम माहेश्वरी, खानधारक मुंशी चौहान, सब्बीर अहमद सहित क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने समिति को मकराना की बंद खदानों की जमीनी स्थिति से अवगत करवाया और बताया कि खनन गतिविधियां बंद होने से इसका सीधा असर खानधारकों के साथ-साथ मजदूरों, व्यापारियों और खनन से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ा है।
विधायक जाकिर हुसैन गैसावत ने समिति के समक्ष मकराना माइंस का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाते हुए कहा कि मकराना की पहचान और यहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार खनन व्यवसाय है। खदानों के बंद होने से रोजगार और व्यापार दोनों प्रभावित हुए हैं।

‘गलत सर्वे ने बंद कर दीं खदानें, फिर से हो वास्तविक सर्वे’
जनसुनवाई में खानधारकों की ओर से स्पष्ट मांग रखी गई कि मकराना क्षेत्र का दोबारा वैज्ञानिक एवं वास्तविक सर्वे करवाया जाए। जिन खदानों को गलत सर्वे अथवा गलत आकलन के आधार पर अरावली पॉलिगॉन क्षेत्र में शामिल किया गया है, उन्हें इस क्षेत्र से बाहर किया जाए, ताकि नियमानुसार खनन गतिविधियों को पुनः शुरू किया जा सके।

खानधारकों का कहना है कि यह सिर्फ खदान मालिकों का मामला नहीं है, बल्कि इससे मजदूरों, ट्रांसपोर्ट, मार्बल कारोबार, कटिंग-पॉलिशिंग इकाइयों, व्यापार और स्थानीय बाजार से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होती है।
पार्टी, जाति और धर्म से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील
विधायक गैसावत ने कहा कि मकराना की खदानों से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। ऐसे में खानधारकों, मजदूरों, व्यापारियों और क्षेत्रवासियों को पार्टी, जाति और धर्म से ऊपर उठकर एकजुट होकर आवाज बुलंद करनी होगी।
उन्होंने कहा कि मकराना की खदानों से जुड़ी समस्या का समाधान होने पर क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, व्यापार को गति मिलेगी और मकराना का आर्थिक पहिया फिर से सुचारू रूप से घूम सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट के मामले के बाद बनी हाई पावर कमेटी
अरावली क्षेत्र और खनन से जुड़े विवादों के बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस पूरे विषय की व्यापक जांच और विशेषज्ञ स्तर पर विचार के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित किए जाने के बाद विभिन्न अरावली क्षेत्रों का क्षेत्रीय भ्रमण किया जा रहा है। समिति के कार्यक्रम के तहत 6 से 10 अगस्त 2026 तक दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के अरावली क्षेत्रों का भ्रमण किया जा रहा है। इसी क्रम में 9 अगस्त को अजमेर में जनसुनवाई आयोजित की गई।

अब मकराना के खानधारकों की नजर हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। यदि मकराना की बंद खदानों के संबंध में वास्तविक सर्वे और पुनर्विचार की मांग स्वीकार होती है, तो लंबे समय से बंद खनन गतिविधियों को लेकर नई उम्मीद पैदा हो सकती है।
