73 दिन बाद खत्म हुआ भीवपुरा हमला मामले का धरना, DySP के आश्वासन पर माने परिजन; जांच पूरी होने के बाद होगी विधिसम्मत कार्रवाई

डीडवाना – कुचामन जिले के मारोठ थाना क्षेत्र के बहुचर्चित भीवपुरा जानलेवा हमला प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नावां उपखंड कार्यालय के बाहर पिछले 73 दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को समाप्त हो गया। पुलिस उपाधीक्षक कुचामन गरिमा चौधरी और नावां थानाधिकारी नंदलाल रिणवां की समझाइश तथा निष्पक्ष कार्रवाई के आश्वासन के बाद पीड़ित परिवार और ग्रामीण धरना समाप्त करने पर सहमत हुए।

धरना समाप्त होने से पहले पीड़ित पक्ष ने पुलिस उपाधीक्षक गरिमा चौधरी से आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार को न्याय, आर्थिक सहायता तथा दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग दोहराई।

इस दौरान RPS गरिमा चौधरी ने कहा कि वर्तमान में इस मुकदमे की जांच फाइल अजमेर स्थित एएसपी (अभय कमांड सेंटर) रविन्द्र सिंह के पास है और वे मामले का अनुसंधान कर रहे हैं। अनुसंधान पूरा होने के बाद फाइल डीडवाना-कुचामन जिले में प्राप्त होगी। इसके बाद जांच के निष्कर्षों के आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद परिजनों ने 73 दिनों से जारी धरना समाप्त करने की घोषणा की।

धरना समाप्त कराने की पूरी प्रक्रिया में आसूचना अधिकारी राजेश गुर्जर और कांस्टेबल विजेन्द्र कुमार की भी भूमिका रही। इस दौरान नावां थानाधिकारी नंदलाल रिणवां सहित पुलिस विभाग के कई अधिकारी एवं जवान मौजूद रहे।

हालांकि, पीड़ित परिवार ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन के आश्वासन के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे की रणनीति तय कर दोबारा आंदोलन शुरू करने पर विचार करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

बीती 4 अप्रैल 2026 की रात भीवपुरा निवासी शिशपाल और रामकुमार पर कथित रूप से कुछ लोगों ने रास्ता रोककर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया था। हमले में शिशपाल गंभीर रूप से घायल हो गया। इस संबंध में 5 अप्रैल 2026 को मारोठ थाने में एफआईआर संख्या 47/2026 दर्ज की गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के बाद लंबे समय तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से उनमें आक्रोश व्याप्त हो गया था।

आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर 20 अप्रैल से नावां उपखंड कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया था। धरने के दौरान कई सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने समर्थन दिया। सात लोगों ने क्रमिक अनशन भी किया, जबकि पीड़ित शिशपाल ने न्याय नहीं मिलने पर राष्ट्रपति को इच्छा मृत्यु की अनुमति देने संबंधी पत्र भी भेजा था। आखिरकार 73 दिनों बाद पुलिस प्रशासन के आश्वासन पर धरना समाप्त कर दिया गया।

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