मारोठ। सकल जैन समाज के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और धर्ममय वातावरण से सराबोर रहा। परम पूज्य आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का मारोठ में भव्य मंगल प्रवेश कलश यात्रा एवं विशाल शोभायात्रा के साथ हुआ। नगर के प्रमुख मार्गों से निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मध्वज, मंगल कलश और बैंड-बाजों के साथ शामिल हुए। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे नगर में जयघोष और भक्ति का वातावरण बना रहा।

मंगल प्रवेश के बाद आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री ने अहिंसा, संयम, सेवा, त्याग और जीवदया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जीव रक्षा करना और त्याग करना ही जैन धर्म की सच्ची पहचान है।” उन्होंने मारोठ जैन समाज द्वारा संचालित जीव दया पालक समिति (बकरशाला) की विशेष सराहना करते हुए कहा कि जो समाज मूक प्राणियों के जीवन की रक्षा करता है, वही वास्तविक अर्थों में धर्म का पालन करता है। जीवों को जीवन देने से बड़ा कोई पुण्य नहीं हो सकता और मारोठ जैन समाज का यह सेवा कार्य पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है।

धर्मसभा में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट, पाद पक्षालन एवं महाआरती का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। प्रवचन पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
आचार्य श्री के मंगल प्रवेश को लेकर पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, युवाओं ने शोभायात्रा की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली, जबकि समाज के वरिष्ठजनों ने बाहर से आए श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन में सीकर, जयपुर, कुचामन, नावां सहित आसपास के अनेक गांवों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

मारोठ जैन मुनि सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि चित्र अनावरण का सौभाग्य संदीप जैन गोधा (मकराना), दीप प्रज्वलन का सौभाग्य नेहरू पहाड़िया (कुचामन), पाद पक्षालन का सौभाग्य सुभाष चंद्र बड़जात्या परिवार (जयपुर), महाआरती का सौभाग्य विमल कुमार–निर्मल कुमार बिंदायकया परिवार (मारोठ) तथा शास्त्र भेंट का सौभाग्य सपना देवी, शुभम कुमार एवं दीपक कुमार पाटनी परिवार (मारोठ) को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर आचार्य श्री ने मारोठ के चारों जैन मंदिरों के दर्शन भी किए। उन्होंने कहा कि मारोठ के चारों मंदिर किसी अतिशय क्षेत्र से कम नहीं हैं। यहां के चारों मंदिरों के दर्शन करना एक तीर्थ क्षेत्र की यात्रा के समान पुण्यदायी है। उनके इस संदेश से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था का संचार हुआ।
