बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ पर सख्ती, नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना और सीज की कार्रवाई
कुचामन सिटी। डीडवाना-कुचामन जिले में स्कूली बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही बाल वाहिनियों में नियमों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए विशेष जांच अभियान चलाया। मंगलवार को चलाए गए अभियान के दौरान कुचामन सिटी में स्कूल बसों, वैन और बाल वाहिनियों की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद 11 वाहनों के चालान काटे गए, जबकि कई वाहनों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ कुछ वाहनों को सीज भी किया गया। विभाग के अनुसार कई बाल वाहिनियां बिना फिटनेस, वैध परमिट और जरूरी दस्तावेजों के संचालित मिलीं, वहीं कुछ वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था।

कई चालकों और परिचालकों ने निर्धारित वर्दी नहीं पहन रखी थी, जबकि दो बसों में परिचालक भी नहीं मिले। जांच के दौरान कुछ वाहनों में जीपीएस, लोहे की सुरक्षा ग्रिल, अग्निशमन यंत्र सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण भी नहीं पाए गए। एक निजी वैन में स्कूली बच्चों को ले जाया जा रहा था, लेकिन उसके पास स्कूल वाहन का आवश्यक परमिट नहीं था।

परिवहन अधिकारी किरण कुमार व गणपत राम ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अनफिट, ओवरलोडिंग और बिना वैध दस्तावेजों के संचालित स्कूल एवं निजी वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले 6 महीनों में जिलेभर में 200 से ज्यादा बाल वाहिनियों के चालान बनाए जा चुके हैं, जिनसे परिवहन विभाग को करीब 15 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
चालान से बचने के लिए ‘सिफारिशी फोन’ का सहारा! नियमों से ज्यादा भारी न पड़े राजनीतिक दबाव
परिवहन विभाग की कार्रवाई के दौरान कुछ निजी स्कूल संचालकों की ओर से कार्रवाई रुकवाने के लिए राजनीतिक दबाव डलवाने की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई। सवाल यह है कि जब मामला छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा का हो तो नियमों की पालना के बजाय ‘सिफारिश’ का रास्ता क्यों तलाशा जाए? स्कूल संचालकों को यह समझना होगा कि बच्चों की सुरक्षा उनकी पहली जिम्मेदारी है। सरकार ने स्कूल वाहनों के लिए जो नियम और सुरक्षा मानक तय किए हैं, उनका पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाने के लिए जरूरी है। पिछले कुछ समय में स्कूल वाहनों से जुड़े कई हादसे सामने आ चुके हैं।

ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही भी किसी परिवार के लिए जिंदगीभर का दर्द बन सकती है। डीडवाना-कुचामन जिले के सभी निजी विद्यालयों से अपील है कि विद्यार्थियों के आवागमन के लिए संचालित अपने सभी वाहनों को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के मुताबिक अपडेट रखें। नियमों की पालना होगी तो न चालान का डर रहेगा और न कार्रवाई रुकवाने के लिए किसी ‘राजनीतिक सिफारिश’ की जरूरत पड़ेगी। आखिर बच्चों की सुरक्षा के आगे सिफारिश भी कितनी बड़ी हो सकती है?
परिवहन विभाग ने सभी स्कूल वाहन संचालकों और चालकों को नियमों की सख्ती से पालना करने तथा वाहनों की फिटनेस, जरूरी दस्तावेज और सुरक्षा मानक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ आगे भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।
