कुचामन सिटी। मुआवजा दिलाने का झांसा देकर एक परिवार से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने तथा बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि हड़पने के प्रयास का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में कुचामन थाने में परिवाद देकर आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने परिवाद दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

दीपपुरा निवासी प्रभूराम कुमावत ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वर्ष 2022 में उनकी संयुक्त खातेदारी की भूमि का एक हिस्सा नई रिंग रोड निर्माण में चला गया था। इसके बाद संबंधित भूमि के नए खसरा नंबर कायम हुए, लेकिन नामांतरण दर्ज नहीं होने से रिकॉर्ड में खातेदारी पूर्ववत बनी रही।
परिवाद के अनुसार करीब तीन वर्ष पूर्व एक व्यक्ति ने स्वयं को वकील बताते हुए परिवार से संपर्क किया और रिंग रोड में गई जमीन के बदले नगरपालिका से लगभग 11 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाया। इसी बहाने उसने परिवार का विश्वास जीत लिया और लगातार संपर्क में रहा।
शिकायत में बताया गया कि परिवार के एक खातेदार की मृत्यु के बाद आरोपित ने मुआवजा प्राप्त करने के लिए उत्तराधिकारियों का नामांतरण आवश्यक बताते हुए उनके नाम खातेदारी में दर्ज करवाए। साथ ही भूमि पर बकाया केसीसी ऋण का भुगतान कराकर बैंक से नो-ड्यूज भी प्राप्त कर लिया।
तहसील बुलाकर करवाए हस्ताक्षर
प्रभूराम के अनुसार 18 जून 2026 को फोन कर बताया गया कि भूमि का मुआवजा तहसील में जमा हो चुका है और सभी हिस्सेदारों को आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए तहसील परिसर पहुंचना होगा। इस सूचना पर परिवार के सभी हिस्सेदार तहसील पहुंचे, जहां उन्हें एक कार्यालय में ले जाकर फोटो खिंचवाएं और विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।
परिवार का आरोप है कि दस्तावेजों को पढ़ने, समझने तथा उनकी प्रतिलिपि लेने की मांग करने पर जल्दबाजी दिखाई गई और मुआवजा नहीं मिलने का भय दिखाया गया। इसी दबाव में परिवार के सदस्यों से फोटो और हस्ताक्षर करवा लिए गए।

बाद में हुआ शक, सामने आया कथित खेल
परिवार का कहना है कि घर लौटने के बाद पूरे घटनाक्रम पर चर्चा करने पर उन्हें संदेह हुआ। जानकारी जुटाने पर पता चला कि मुआवजे की प्रक्रिया के नाम पर संबंधित भूमि से जुड़े विनिमय पत्र और विक्रय विलेख तैयार करवा लिए गए हैं।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि रिंग रोड में गई भूमि के बदले नगरपालिका से प्राप्त खसरा संख्या 2131 की लगभग 3764 वर्गमीटर भूमि, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है, को हड़पने की नीयत से कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि उन्हें दस्तावेजों की वास्तविक प्रकृति की जानकारी होती तो वे किसी भी स्थिति में उन पर हस्ताक्षर नहीं करते।
पीड़ित पक्ष ने मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और संपत्ति हड़पने के प्रयास की धाराओं में कार्रवाई की मांग की है।

जांच अधिकारी शिव भगवान ने बताया कि प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर परिवाद दर्ज कर लिया गया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
