श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की दिव्य कथाओं से गूंजा कथा पंडाल, श्रीकृष्ण जन्म की मनोहारी झांकी बनी आकर्षण का केंद्र


कुचामन सिटी। हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक आनंद में सराबोर हो गए। कथा व्यास, राष्ट्रवादी विचारक एवं परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज (जयपुर) ने भगवान श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा और भक्ति का संदेश दिया।


कथा के दौरान भगवान श्रीराम के अवतरण से लेकर उनके आदर्श जीवन के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया गया। आचार्य श्री ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल एक राजा नहीं, बल्कि आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श शासक के रूप में संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यदि समाज श्रीराम के आदर्शों को अपनाए तो परिवारों में प्रेम, संस्कार और सामाजिक समरसता स्वतः स्थापित हो सकती है।
इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग प्रारंभ होते ही कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। महाराज श्री ने कंस के अत्याचारों, देवकी-वसुदेव की पीड़ा तथा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतरण का ऐसा भावपूर्ण चित्रण किया कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे। भगवान के प्राकट्य का प्रसंग आते ही श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भक्ति भाव प्रकट किया।


कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्म की मनोहारी झांकी सजाई गई, जिसने सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयघोषों से पूरा कथा पंडाल गुंजायमान हो उठा। आकर्षक सजावट, सुंदर झांकी और भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे तथा भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज ने कहा कि भगवान के अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं होते, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना, मानवता के संरक्षण और समाज को सही दिशा देने के लिए होते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम मर्यादा के प्रतीक हैं तो श्रीकृष्ण जीवन प्रबंधन और कर्मयोग के। दोनों के आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल एवं सार्थक बना सकता है।


महाराज श्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कार और धार्मिक मूल्यों को जीवन में बनाए रखना आवश्यक है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को आत्मचिंतन, सदाचार और ईश्वर भक्ति का मार्ग दिखाती है।
आयोजक सुखाराम कड़वा (गुरु कृपा प्रॉपर्टीज) ने बताया कि कथा के प्रति श्रद्धालुओं में प्रतिदिन उत्साह बढ़ता जा रहा है। आसपास के गांवों एवं शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में संस्कार, एकता और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का माध्यम है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आगामी दिनों में भी अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म एवं संस्कृति के इस महायज्ञ का लाभ लेने का आग्रह किया।


गौरतलब है कि नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है। इससे पूर्व कथा के तृतीय दिवस पर नरसिंह अवतार, गजेन्द्र मोक्ष, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव एवं महाराज भरत के प्रेरणादायक चरित्रों का वर्णन किया गया था, जबकि भगवान वामन अवतार की मनोहारी झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी थी।
कथा स्थल पर प्रतिदिन भजन-कीर्तन, धार्मिक झांकियों एवं प्रवचनों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। कथा के समापन पर महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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