वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार और रैगिंग मुक्त शिक्षा पर जागरूकता शिविर आयोजित, न्यायाधीशों ने दी महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी


कुचामन सिटी। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नाहर सिंह मीणा के निर्देशानुसार तथा तालुका विधिक सेवा समिति की अध्यक्ष कुसुम सुत्रकार के आदेशानुसार कुचामन विकास समिति के तत्वावधान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुन्दर लाल खारोल एवं विशिष्ट न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट दुष्यन्त गुर्जर ने विद्यार्थियों को नालसा की वरिष्ठ नागरिक योजना एवं “रैगिंग फ्री कैंपस, फियर फ्री एजुकेशन” अभियान के बारे में जानकारी दी।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुन्दर लाल खारोल ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज के अनुभव, ज्ञान और संस्कारों के अमूल्य स्रोत हैं। उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में समर्पित किया है, इसलिए उनका सम्मान, संरक्षण और कल्याण सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष विधिक सेवाएं योजना संचालित की जा रही है, जिसके तहत उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी सलाह तथा न्याय तक सरल पहुंच उपलब्ध कराई जाती है।


खारोल ने कहा कि भरण-पोषण, संपत्ति, उत्तराधिकार और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में वरिष्ठ नागरिकों को विधिक सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के अनुसार संतान का यह कानूनी दायित्व है कि वह अपने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करे। यदि कोई वरिष्ठ नागरिक उपेक्षा, प्रताड़ना या अधिकारों के हनन का शिकार होता है तो वह संबंधित प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कर न्याय प्राप्त कर सकता है, जिसमें विधिक सेवा संस्थाएं उसकी सहायता करती हैं।


वहीं न्यायिक मजिस्ट्रेट दुष्यन्त गुर्जर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है। विद्यालय और महाविद्यालय विद्यार्थियों के सपनों को आकार देने वाले संस्थान हैं, इसलिए उनका वातावरण सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रैगिंग एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो विद्यार्थियों के आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। कई बार इसे मजाक या परिचय का माध्यम समझ लिया जाता है, लेकिन वास्तव में रैगिंग से भय, तनाव, अवसाद और पढ़ाई के प्रति अरुचि जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। गुर्जर ने बताया कि रैगिंग रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं तथा यूजीसी के नियमों के तहत दोषी विद्यार्थियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से रैगिंग के खिलाफ जागरूक रहने और शिक्षण संस्थानों को रैगिंग मुक्त, सुरक्षित एवं भयमुक्त बनाने में सहयोग करने का आह्वान किया।
शिविर के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने नालसा एवं रालसा द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी तथा विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों एवं उपलब्ध विधिक सेवाओं के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षण संस्थान के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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