“जब असलम रख सकते हैं रोजा, तो हम क्यों नहीं?” — स्वस्थ होकर भी रोजा नहीं रखने वाले लोगों के लिए आईना बने कुचामन सिटी के असलम टाक
कुचामन सिटी के गुलजारपुरा मोहल्ले से इन दिनों एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि इबादत के लिए जिस्म नहीं, जज़्बा चाहिए। जन्म से दिव्यांग असलम टाक रमजान के पाक महीने में जिस संकल्प और लगन के साथ रोजे रख रहे हैं, वह न सिर्फ मुस्लिम समाज बल्कि हर इंसान के लिए प्रेरणा बन गया है। शारीरिक सीमाएं, लेकिन इरादा फौलादी असलम टाक के दोनों हाथ और पैर पूरी तरह विकसित नहीं हैं। वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए…
