बीट पुलिसिंग के नए मॉडल के प्रथम चरण में डीडवाना-कुचामन जिला शामिल, एसपी डॉ. प्यारे लाल शिवरान के निर्देशन में होगा क्रियान्वयन
डीडवाना-कुचामन, राजस्थान में बीट पुलिसिंग को आधुनिक, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राजस्थान पुलिस ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजस्थान पुलिस और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D), गृह मंत्रालय, भारत सरकार के बीच हुए महत्वपूर्ण एमओयू के तहत शुरू की जा रही नवीन बीट पुलिसिंग व्यवस्था के प्रथम चरण में डीडवाना-कुचामन जिले का भी चयन किया गया है।
जिले में इस नई व्यवस्था को पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान (IPS) के निर्देशन में राज्य स्तर से प्राप्त दिशा-निर्देशों और निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत बीट पुलिसिंग को तकनीक से जोड़ते हुए पुलिस और आमजन के बीच संवाद मजबूत करने, स्थानीय सूचना तंत्र विकसित करने तथा अपराध एवं हॉटस्पॉट की प्रभावी मैपिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा।
राजस्थान पुलिस और BPR&D के बीच हुआ एमओयू
बीट पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, जनोन्मुखी और तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से सोमवार को पुलिस मुख्यालय, जयपुर में राजस्थान पुलिस और BPR&D के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

कार्यक्रम में राजस्थान पुलिस के महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा एवं BPR&D के महानिदेशक आलोक मित्तल की मौजूदगी में राजस्थान पुलिस की ओर से उप महानिरीक्षक (क्राइम) दीपक भार्गव तथा BPR&D की ओर से उप महानिरीक्षक, नेशनल पुलिस मिशन डॉ. किरण कंग सिद्धू ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
यह पहल DGP/IGP कांफ्रेंस-2025 की सिफारिशों के अनुरूप तैयार किए गए एक वर्षीय एक्शन प्लान का हिस्सा है।
एसपी डॉ. प्यारे लाल शिवरान के निर्देशन में आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
डीडवाना-कुचामन जिले का प्रथम चरण में चयन होने के बाद जिले में नई बीट पुलिसिंग व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान (IPS) के निर्देशन में आगे बढ़ाई जाएगी।
एसपी डॉ. शिवरान ने कहा कि बीट पुलिसिंग पुलिस और आमजन के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।

तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के साथ बीट स्तर की पुलिसिंग को और मजबूत किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर अपराध की रोकथाम, सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और आमजन से बेहतर संवाद को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने कहा कि जिले में राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार नवीन व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नौ जिलों में शुरू होगा नवीन मॉडल
एमओयू के तहत नवीन बीट पुलिसिंग व्यवस्था के प्रथम चरण में प्रत्येक रेंज से एक-एक, कुल नौ जिलों का चयन किया गया है। इनमें सीकर, जयपुर उत्तर, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, कोटा शहर, डूंगरपुर, चूरू, जैसलमेर और जोधपुर पश्चिम शामिल हैं।
प्रथम चरण में इन जिलों के अनुभवों और नवाचारों के आधार पर भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा।
बीट स्तर पर मजबूत होगा पुलिस-जन संवाद
नई व्यवस्था के तहत पुलिस और आमजन के बीच नियमित संवाद को मजबूत किया जाएगा। कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (CLG), पुलिस मित्र और अन्य सामुदायिक माध्यमों को सक्रिय किया जाएगा।
‘नो योर बीट ऑफिसर’ जैसी पहल के माध्यम से आमजन को अपने क्षेत्र के बीट अधिकारी से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों तथा कमजोर और संवेदनशील वर्गों के साथ लक्षित संवाद को भी बीट पुलिसिंग का हिस्सा बनाया जाएगा।
डिजिटल बीट प्रोफाइल और हॉटस्पॉट मैपिंग पर जोर
बीट बुक, विलेज क्राइम नोट बुक और डिजिटल बीट प्रोफाइल के माध्यम से स्थानीय स्तर की सूचनाओं को व्यवस्थित किया जाएगा। अपराध और हॉटस्पॉट की मैपिंग से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर पुलिस की गश्त और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

राजकॉप ई-बीट बुक होगी और सशक्त
तकनीक आधारित बीट पुलिसिंग के तहत राजकॉप ई-बीट बुक की क्षमताओं को भी और विकसित किया जाएगा। GPS, जियो-टैगिंग, QR आधारित सुविधाएं, डिजिटल दस्तावेजीकरण और डैशबोर्ड जैसी तकनीकों का आवश्यकता के अनुसार इस्तेमाल किया जाएगा।
इससे बीट अधिकारियों की गतिविधियों की निगरानी, सूचनाओं का अपडेट और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण अधिक प्रभावी हो सकेगा।
KPI के आधार पर होगी समीक्षा
नई बीट पुलिसिंग व्यवस्था की प्रभावशीलता को Key Performance Indicators (KPI) के आधार पर मापा जाएगा। बीट से लेकर थाना, जिला और राज्य स्तर तक संरचित रिपोर्टिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी।
अच्छे कार्यों और स्थानीय स्तर पर किए गए नवाचारों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा, ताकि सफल मॉडल को दूसरे क्षेत्रों में लागू किया जा सके।
बीट अधिकारियों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए बीट अधिकारियों और पर्यवेक्षण अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक एवं रिफ्रेशर प्रशिक्षण, ट्रेनर्स की ट्रेनिंग और कैस्केड ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर को नोडल प्रशिक्षण संस्थान बनाया गया है।
BPR&D देगा विशेषज्ञ मार्गदर्शन
एमओयू के तहत BPR&D की ओर से सामान्य क्रियान्वयन ढांचा, प्रशिक्षण सामग्री, मॉडल प्रारूप, समीक्षा उपकरण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं बीट पुलिसिंग की मैदानी एवं परिचालन व्यवस्था, मानव संसाधन, लॉजिस्टिक्स, स्थानीय स्तर पर आवश्यक आदेश, प्रशिक्षण और तकनीकी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी राजस्थान पुलिस की रहेगी।
डीडवाना-कुचामन जिले का इस महत्वपूर्ण पायलट चरण में चयन होने से जिले की बीट पुलिसिंग व्यवस्था में तकनीक और जनसहभागिता का नया मॉडल विकसित होने की उम्मीद है। इससे पुलिस-जन संवाद मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर अपराध की रोकथाम और पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
