डीडवाना – कुचामन, नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट के बीच राजस्थान सरकार ने प्रदेश के शहरों की उन बुनियादी समस्याओं की ओर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं, जिनसे आम जनता लंबे समय से जूझ रही है। स्वायत्त शासन निदेशालय ने प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं को डोर-टू-डोर शत-प्रतिशत कचरा संग्रहण, कचरा यार्ड में लिगेसी वेस्ट नहीं बढ़ने देने, बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, बंद स्ट्रीट लाइटों को चालू करवाने तथा सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं को रेस्क्यू कर गौशालाओं में पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

सरकार के इस निर्देश को लेकर पूर्व उप मुख्य सचेतक एवं विपक्ष के वरिष्ठ नेता महेंद्र चौधरी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि जनता की मूलभूत समस्याओं का समाधान नियमित रूप से किया जाता तो चुनाव नजदीक आने पर इस तरह के निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं पड़ती। चौधरी ने कहा कि प्रदेश के शहरों में आम नागरिक लंबे समय से टूटी सड़कों, बंद लाइटों, कचरे और आवारा पशुओं जैसी समस्याओं से परेशान हैं।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या जनता की समस्याएं केवल चुनाव के समय ही दिखाई देती हैं? उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों और पंचायत चुनावों की आहट के साथ सरकार को अब शहरों की सफाई, सड़कों और स्ट्रीट लाइटों की याद आ रही है। जनता को चुनाव के समय सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला काम चाहिए।

8 अगस्त को जारी हुआ आदेश
स्वायत्त शासन निदेशालय की ओर से 8 अगस्त 2026 को प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के आयुक्त एवं अधिशाषी अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत नगर निकायों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण नियमित रूप से शत-प्रतिशत कराया जाए।
इसके साथ ही कचरा यार्ड में लिगेसी वेस्ट को किसी भी स्थिति में बढ़ने नहीं देने, बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत करवाने और सड़कों पर बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को चालू करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
सड़कों पर घूमने वाले लावारिस पशुओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से गौशालाओं में पहुंचाने के लिए भी आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया है।

मूलभूत जिम्मेदारियों की याद दिलाई
निदेशालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कचरा संग्रहण, लिगेसी वेस्ट का प्रबंधन, सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइटों को चालू रखना और लावारिस पशुओं की व्यवस्था करना नगरीय निकायों की मूलभूत जिम्मेदारियों में शामिल है।
यह आदेश स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के ब्रांड एम्बेसडर के.के. गुप्ता की ओर से 6 अगस्त को भेजे गए पत्र के संदर्भ में जारी किया गया है।

चुनाव से पहले क्यों याद आई व्यवस्था?
राजस्थान में नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज होने के बीच सरकार की ओर से जारी यह निर्देश राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष इसे चुनावी तैयारी से जोड़कर देख रहा है।
विपक्ष का तर्क है कि शहरों में सफाई, सड़क, स्ट्रीट लाइट और आवारा पशुओं जैसी समस्याएं नई नहीं हैं। ये रोजमर्रा की समस्याएं हैं और इनके समाधान के लिए चुनाव का इंतजार नहीं होना चाहिए।

महेंद्र चौधरी ने कहां की नावां विधानसभा क्षेत्र सहित प्रदेश भर के नगरी निकाय बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं और सरकार को चुनाव का वक्त करीब आने पर जनता की याद आई है
महेंद्र चौधरी ने सरकार से मांग की कि यदि वास्तव में आम जनता को राहत देना उद्देश्य है तो इन निर्देशों को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रत्येक नगर निकाय में इसकी नियमित मॉनिटरिंग हो और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि निदेशालय के इन निर्देशों का असर प्रदेश के शहरों में जमीन पर कितना दिखाई देता है और क्या बारिश से बदहाल सड़कें, बंद स्ट्रीट लाइटें, जगह-जगह फैला कचरा तथा सड़कों पर घूमते लावारिस पशु वास्तव में चुनाव से पहले जनता को राहत दे पाएंगे।
