डीडवाना-कुचामन, राजस्थान एसोसिएशन ऑफ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (RACHO) के बैनर तले जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन के जिलाध्यक्ष ओंकार चौधरी के नेतृत्व में जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम जिला कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेन्द्र चौधरी को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेशभर में पिछले चार वर्षों से उप स्वास्थ्य केंद्रों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा अब तक उनके लिए नियमित पदों का सृजन नहीं किया गया है और न ही संविदा CHO के लिए अलग कैडर का गठन किया गया है। इससे प्रदेश के करीब 9700 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों में अपने भविष्य और सेवा सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और असंतोष व्याप्त है।

संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा तीन वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को 10 प्रतिशत लॉयल्टी बोनस देने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक इसका लाभ नहीं दिया गया है। इससे कर्मचारियों में निराशा बढ़ी है और सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
7 दिन में समाधान नहीं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन
ज्ञापन के माध्यम से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री से मांग की गई है कि सरकार सात दिनों के भीतर संगठन के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय ले। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो 23 जून 2026 को जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर प्रदेशभर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे।
संगठन ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान यदि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और चिकित्सा विभाग की होगी।
ये हैं प्रमुख मांगें
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने ज्ञापन में निम्न मांगों को प्रमुखता से उठाया—
CHO के नियमित पदों का सृजन किया जाए।
संविदा CHO का पृथक कैडर बनाया जाए।
सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
घोषित 10 प्रतिशत लॉयल्टी बोनस का भुगतान किया जाए।
अन्य लंबित मांगों का शीघ्र समाधान किया जाए।

जिलाध्यक्ष ओंकार चौधरी ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी पिछले चार वर्षों से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनकर कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने में CHO की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन इसके बावजूद सरकार उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा अब काफी लंबी हो चुकी है। यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एकजुट होकर अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए निर्णायक आंदोलन करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समय रहते समाधान निकालेगी।

ये रहे उपस्थित
इस दौरान प्रदेश महासचिव प्रवीण कड़वा, जिला उपाध्यक्ष लाला राम, मनोज कुमार सहित जिला कार्यकारिणी के सदस्य शैलेन्द्र सिंह, चेला राम, अजय सिंह, धर्मेन्द्र खिलेरी, पंकज शर्मा, अशोक सैनी, अभिषेक गौड़, मुकेश गोठवाल, विष्णु, सुमन, काजल एवं जिले के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।
संगठन ने कहा कि अब सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अपने अधिकारों, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा के लिए एकजुट हैं तथा सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।
