हर व्यक्ति का कोई न कोई शौक होता है, लेकिन कुछ लोग अपने शौक को इतनी गंभीरता और समर्पण के साथ निभाते हैं कि वह दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन जाता है। कुचामन सिटी की न्यू कॉलोनी निवासी एवं रेडीमेड गारमेंट व्यवसायी रमेश अग्रवाल का ऐसा ही एक अनोखा शौक इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्हें दुनिया के विभिन्न देशों की मुद्राएं (करेंसी नोट) संग्रहित करने का शौक है और आज उनके पास 50 से अधिक देशों के करेंसी नोटों का दुर्लभ संग्रह मौजूद है।

रमेश अग्रवाल के इस संग्रह में दुनिया के कई बड़े देशों के साथ-साथ छोटे देशों की मुद्राएं भी शामिल हैं। अलग-अलग रंग, आकार, डिजाइन और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले ये नोट न केवल आर्थिक महत्व रखते हैं, बल्कि विभिन्न देशों के इतिहास और संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत करते हैं।
रमेश अग्रवाल बताते हैं कि उनके रेडीमेड गारमेंट व्यवसाय के कारण देश-विदेश के अनेक लोगों से संपर्क बना रहता है। इसी दौरान विदेशों में रहने वाले परिचितों और ग्राहकों के माध्यम से उन्हें विभिन्न देशों की मुद्राएं प्राप्त हुईं। इसके अलावा जब भी उन्हें विदेश यात्रा का अवसर मिला, तो वहां से भी उन्होंने स्थानीय करेंसी को अपने संग्रह का हिस्सा बनाया। समय के साथ यह शौक जुनून में बदल गया और उन्होंने अलग-अलग माध्यमों से दुनिया भर की मुद्राएं जुटाने का सिलसिला जारी रखा।

रमेश अग्रवाल का कहना है कि शुरुआत में उन्होंने केवल कुछ देशों की मुद्राएं यादगार के रूप में संभालकर रखी थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह संग्रह बढ़ता गया। आज उनके पास 50 से अधिक देशों के नोट हैं और वे लगातार अपने संग्रह को और समृद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि विभिन्न देशों की मुद्राएं उस देश की संस्कृति, इतिहास और पहचान को समझने का एक रोचक माध्यम होती हैं। भविष्य में वे और अधिक देशों की करेंसी अपने संग्रह में शामिल करना चाहते हैं।

रमेश अग्रवाल के इस मुद्रा क्लेक्शन को देखने पहुंचे पत्रकार हेमराज पारीक ने कहा कि आधुनिक दौर में जहां लोग डिजिटल दुनिया में व्यस्त होते जा रहे हैं, वहीं रमेश अग्रवाल जैसे लोग अपने अनूठे शौक के माध्यम से इतिहास, संस्कृति और वैश्विक विविधता को संजोने का कार्य कर रहे हैं। विभिन्न देशों की मुद्राओं का यह संग्रह न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा का विषय है कि वे अपने शौक को सकारात्मक दिशा देकर उसे पहचान बना सकते हैं।

रमेश अग्रवाल का यह अनोखा संग्रह कुचामन क्षेत्र में लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जो भी उनके संग्रह को देखता है, वह उनकी लगन, धैर्य और समर्पण की सराहना किए बिना नहीं रह पाता।
