वामन अवतार की मनोहारी झांकी बनी आकर्षण का केंद्र, नरसिंह अवतार और गजेन्द्र मोक्ष की कथा से भक्त हुए भावविभोर


कुचामन सिटी। हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर श्रद्धालुओं ने भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिकता का अनुपम संगम देखा। कथा पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे वातावरण में भक्ति रस की सरिता बहती रही।
कथा व्यास एवं राष्ट्रवादी विचारक परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज (जयपुर) ने भगवान के विभिन्न अवतारों एवं भक्तों के चरित्रों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया। उन्होंने नरसिंह अवतार, गजेन्द्र मोक्ष, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव एवं महाराज भरत के प्रेरणादायक प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया।


आचार्य श्री ने नरसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति के सामने कोई भी विपत्ति अधिक समय तक टिक नहीं सकती।
गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि जब भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है, तब प्रभु स्वयं उसके संकट दूर करने के लिए उपस्थित हो जाते हैं। भगवान द्वारा गजेन्द्र को ग्राह के चंगुल से मुक्त कराने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।


कथा के दौरान ध्रुव की कठोर तपस्या एवं महाराज भरत के वैराग्यपूर्ण जीवन का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में दृढ़ संकल्प, संयम और भगवान के प्रति समर्पण से मनुष्य आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने युवाओं से धर्म, संस्कार और अनुशासन को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर भगवान वामन अवतार की मनोहारी झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। आकर्षक सजावट, दिव्य स्वरूप और भक्तिमय माहौल के बीच श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भगवान के दर्शन किए। झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा कथा पंडाल भक्ति रस से गुंजायमान हो गया।
आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य ज्ञान है। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद, ध्रुव और भरत जैसे चरित्र आज भी समाज को सत्य, त्याग, तपस्या और ईश्वर भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। यदि युवा इन आदर्शों को अपनाएं तो परिवार, समाज और राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बन सकता है।


आयोजक सुखाराम कड़वा ने बताया कि कथा महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में लगातार उत्साह बढ़ रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आगामी दिनों में भी अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म एवं संस्कृति के इस महायज्ञ का लाभ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि कथा के आगामी दिनों में श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन लीला, महारास एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
कथा के अंत में महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा सभी ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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