कुचामन सिटी क्षेत्र के प्याज उत्पादक किसान इन दिनों भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। बाजार में प्याज के दाम लगातार गिरने से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। हालत यह है कि मुनाफा तो दूर, कई किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही। दूसरी ओर खेतों में काम करने वाले मजदूरों की बढ़ी हुई मजदूरी और बारदाना के दामों में हुई बढ़ोतरी ने किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
किसानों का कहना है कि खेती में बीज, खाद, पानी और मजदूरी सहित हर स्तर पर लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन जब फसल तैयार होकर मंडियों में पहुंचती है तो वहां उन्हें बेहद कम भाव मिलते हैं। प्याज की फसल तैयार होने के बावजूद किसानों को मंडियों में लागत से कम दाम मिल रहे हैं, जिससे वे घाटे में जा रहे हैं।
किसान नेता परसाराम बुगालिया ने मीडिया के माध्यम से सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि प्याज उत्पादक किसानों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बाजार में प्याज का उचित भाव नहीं मिल रहा, मजदूरों की मजदूरी लगातार महंगी हो गई है और ऊपर से बारदाना के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। ऐसे में किसानों के लिए खेती करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। सरकार को तुरंत कदम उठाकर प्याज और सब्जियों के उचित दाम सुनिश्चित करने चाहिए तथा बारदाना के बढ़े हुए दामों पर नियंत्रण करना चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।

किसान जगदीश ढाका ने बताया कि प्याज की फसल तैयार करने में किसानों की काफी लागत लगती है, लेकिन मंडी में भाव इतने कम मिल रहे हैं कि लागत भी नहीं निकल पा रही। ऐसे हालात में किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
वहीं किसान हनुमानराम चौधरी, मुनाराम महला, कमलकांत डोडवाडिया, भागुराम बिजारणिया, बिरमाराम बांगड़वा, मदनलाल ढाका और झूमरमल बिजारणिया ने भी चिंता जताते हुए कहा कि एक तरफ मजदूर महंगे मिल रहे हैं और दूसरी तरफ बारदाना के दाम बढ़ गए हैं। इससे खेती करना किसानों के लिए दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि प्याज और सब्जियों के उचित दाम सुनिश्चित किए जाएं तथा खेती से जुड़े जरूरी सामानों के बढ़ते दामों पर नियंत्रण कर किसानों को राहत दी जाए।
