राजस्थान पुलिस अब अपराधियों की कुंडली मिनटों में खोलने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा चुकी है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा और अतिरिक्त महानिदेशक अपराध शाखा हवा सिंह घूमरिया के निर्देशन में राज्यभर की सभी फील्ड यूनिट्स के लिए एनसीआरबी नई दिल्ली द्वारा एक विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक ऐप्स और नए कानूनी उपकरणों की गहन जानकारी देना था, जिससे अनुसंधान की गुणवत्ता और गति दोनों में उल्लेखनीय सुधार हो सके।
आईजी जनमेजय खंडूरी ने दिया उच्च स्तरीय प्रशिक्षण
एनसीआरबी के डिप्टी डायरेक्टर एवं आईजी जनमेजय खंडूरी ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ प्रशिक्षण सत्र को लीड किया। उन्होंने अपराध और अपराधियों की ट्रैकिंग से जुड़े नए डैशबोर्ड, आधुनिक ऐप्स और डिजिटल टूल्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से वांछित अपराधियों की निगरानी, महिलाओं से जुड़े अपराधों की गहन जांच और आधुनिक डेटा विश्लेषण पर केंद्रित रहा।
डीडवाना-कुचामन जिला भी जुड़ा तकनीकी प्रशिक्षण से
डीडवाना-कुचामन जिले से जिला पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर, जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सभी वृत्ताधिकारी, थानाधिकारी तथा सीसीटीएनएस ऑपरेटर भी इस ऑनलाइन कार्यशाला से जुड़े।

जिला स्तर के अधिकारियों ने आधुनिक तकनीक के साथ अपराध अनुसंधान को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया।
जांच की धार होगी और तेज
आईजी खंडूरी ने बताया कि एनसीआरबी के ये नए तकनीकी प्लेटफॉर्म पुलिस के दैनिक कार्यों को न सिर्फ आसान बनाएंगे, बल्कि वांछित अपराधियों का डेटा, उनकी गतिविधियों, पृष्ठभूमि और रिकॉर्ड को तुरंत एक्सेस करने में भी मददगार होंगे। महानिरीक्षक एससीआरबी अजयपाल लाम्बा ने भी इन तकनीकी नवाचारों को पुलिसिंग के भविष्य के लिए अनिवार्य बताते हुए इसके प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।
स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में राजस्थान का बड़ा कदम
यह तकनीकी कार्यशाला राजस्थान पुलिस को स्मार्ट पुलिसिंग, डिजिटल इन्वेस्टिगेशन और डेटा-ड्रिवन क्राइम कंट्रोल की दिशा में एक मजबूत आधार देती है। आधुनिक तकनीक में दक्षता से पुलिस बल डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए और अधिक तैयार होगा तथा आपराधिक न्याय प्रणाली को तेज, सटीक और प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
