सिद्दीकी परिवार की अनोखी पहल : 300 विधिक किताबें सवाई लॉ कॉलेज को समर्पित
वकालत का रोशन इतिहास और सिद्दीकी परिवार की पहचान

वकालत की दुनिया में डीडवाना का सिद्दीकी परिवार एक जाना-पहचाना नाम है। इस परिवार के पूर्वज स्वर्गीय एडवोकेट अब्दुल गनी सिद्दीकी और स्वर्गीय हाफिजुल्लाह सिद्दीकी के साथ एडवोकेट स्वर्गीय अब्दुल वहीद सिद्दीकी भी अपने दौर के जाने-माने वकील रहे हैं। यही नहीं, परिवार के मंसूर अहमद सिद्दीकी पूर्व में राजस्थान हाईकोर्ट में एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) रह चुके हैं और आज भी प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखते हैं। इसी खानदान के एक और कोहिनूर नजीर अहमद सिद्दीकी चुरू के राजगढ़ में लोक अभियोजक के रूप में सेवा दे रहे हैं। परिवार के वरिष्ठ सदस्य मकसूद सिद्दीकी राजस्थान हाईकोर्ट में डिप्टी रजिस्ट्रार रह चुके हैं, वहीं मुजीबुर्रहमान सिद्दीकी जोधपुर हाईकोर्ट में तो जावेद सिद्दीकी डीडवाना में न्यायिक सेवाओं में कार्यरत हैं।

नई पीढ़ी में भी जारी है वकालत का जुनून
सिद्दीकी खानदान की नई पीढ़ी भी वकालत के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही है। वासिफ सिद्दीकी वकालत की पढ़ाई पूरी कर अब राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) की तैयारी कर रहे हैं। वकास सिद्दीकी और मुबीन सिद्दीकी फिलहाल लॉ की पढ़ाई में व्यस्त हैं और अपने परिवार की परंपरा को आगे ले जाने की तैयारी में हैं।
तंजीम सिद्दीकी : कानून की विरासत और महिला सशक्तिकरण की अलख
इस परिवार की बेटी एडवोकेट तंजीम सिद्दीकी अपने पर दादा एडवोकेट अब्दुल गनी सिद्दीकी और बड़े पापा एडवोकेट अब्दुल वहीद सिद्दीकी के पदचिन्हों पर चलते हुए वकालत के क्षेत्र में नाम कमा रही हैं। वे पेशे से एक एडवोकेट हैं और सवाई विधि महाविद्यालय (सवाई लॉ कॉलेज) में लॉ के विद्यार्थियों को पढ़ाती हैं। कानून की गहरी समझ रखने वाली तंजीम सिद्दीकी महिला सशक्तिकरण और जागरूकता के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।

तंजीम सिद्दीकी का कहना है कि “मेरे दादा और बड़े पापा की किताबें सिर्फ कागज़ के पन्ने नहीं, बल्कि न्याय की सोच और इंसाफ का रास्ता दिखाने वाली धरोहर हैं। इन्हें कॉलेज को समर्पित कर मुझे संतोष है कि उनकी विरासत अब सैकड़ों विद्यार्थियों तक पहुँचेगी।”
ज्ञान का दान : 300 विधिक किताबें कॉलेज को भेंट
एडवोकेट तंजीम सिद्दीकी ने अपने पिता अब्दुल शाहिद सिद्दीकी और बड़े भाई जाहिद सिद्दीकी की इच्छा का सम्मान करते हुए अपने दादा और बड़े पापा की विरासत स्वरूप कानून से जुड़ी 300 किताबें सवाई लॉ कॉलेज को भेंट कीं। इस ज्ञान-दान के पीछे उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ी कानून की गहराई को समझे और समाज में न्याय के प्रति जागरूकता फैले।

परिवार की ओर से बड़े भाई जाहिद सिद्दीकी ने कहा कि “हम चाहते हैं कि हमारे पूर्वजों की मेहनत और विधिक ज्ञान आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचे। यह किताबें हमारे परिवार की अमानत हैं जिन्हें अब समाज के काम आना चाहिए।”
संस्थान और समाज के लिए प्रेरणादायी पहल
डॉ. गोरख सिंह और सवाई लॉ कॉलेज प्रशासन ने इस योगदान को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह कदम न केवल छात्रों को विधिक ज्ञान में समृद्ध करेगा बल्कि समाज में भी न्याय और विधि के प्रति सकारात्मक संदेश फैलाएगा। इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य डॉ. गोरख सिंह ने कहा कि “तंजीम सिद्दीकी और उनके परिवार की यह पहल सवाई लॉ कॉलेज के लिए अमूल्य है। छात्र-छात्राओं को इससे न सिर्फ पढ़ाई में मदद मिलेगी बल्कि उन्हें वकालत की जड़ों और परंपराओं को भी जानने का अवसर मिलेगा।”
