फ़ाईजा और शिवम पर हमलों के बाद उबाल में जनता, नगर परिषद पहुंचा गुस्सा
मकराना शहर में आवारा सांडों, कुत्तों और निराश्रित पशुओं के बढ़ते आतंक को लेकर आखिरकार जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है। पिछले दिनों मासूम फ़ाईजा बानो और शिवम सहित कई लोगों पर हुए जानलेवा हमलों के बाद सोमवार को मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत ने अपने ऐलान के मुताबिक नगर परिषद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

विधायक गैसावत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग नगर परिषद पहुंचे, जहां प्रशासक और आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की गई। इस दौरान लोगों में नगर परिषद और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराजगी दिखाई दी।
“मकराना की सड़कें अब लोगों के लिए नहीं, सांडों के लिए रह गई हैं”
ज्ञापन सौंपते हुए विधायक गैसावत ने कहा कि मकराना में हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि लोग घर से निकलने से पहले सड़क की ओर देखकर यह तय करते हैं कि कहीं सामने कोई सांड तो नहीं खड़ा। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा भय के माहौल में जी रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मासूम बच्ची फ़ाईजा बानो पर हुए हमले ने पूरे शहर को झकझोर दिया, लेकिन उसके बाद भी नगर परिषद की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन को बार-बार अवगत करवाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई में व्यस्त हैं।
मासूम फ़ाईजा का मामला बना आंदोलन की वजह
गौरतलब है कि वार्ड नंबर 44 निवासी 11 वर्षीय मासूम बालिका फ़ाईजा तीन दिन पहले आवारा सांड के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। सांड ने उसे सींगों पर उठाकर पटक दिया था, जिससे उसकी आंख और सिर पर गंभीर चोटें आईं। चिकित्सकों को बच्ची के चेहरे के आसपास 18 टांके लगाने पड़े।

फ़ाईजा के पिता मोहम्मद शकील का करीब डेढ़ साल पहले निधन हो चुका है और वह अपने चाचा गुलाम मोहम्मद के पास रह रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की इस बच्ची की दर्दनाक हालत ने पूरे शहर को भावुक कर दिया। इसके बाद शहरभर से लोग उसकी मदद के लिए आगे आए, वहीं लगन शाह मेमोरियल हॉस्पिटल ने उसके निःशुल्क इलाज का जिम्मा उठाया।
इसी बीच शनिवार को एक और मासूम शिवम भी सांड के हमले में घायल हो गया, जिसके बाद लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।

विधायक ने रखीं ये प्रमुख मांगें
नगर परिषद को सौंपे गए ज्ञापन में विधायक गैसावत ने प्रशासन से कई अहम मांगें रखीं। उन्होंने शहर के सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, अस्पतालों और मुख्य बाजारों के आसपास से आवारा पशुओं को तत्काल हटाने की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने हमलों में घायल पीड़ितों को उचित मुआवजा और उपचार का खर्च दिलाने, लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा नियमित रूप से “पशु पकड़ो अभियान” चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विधायक ने कहा कि केवल दिखावटी कार्रवाई नहीं, बल्कि एक स्थायी कार्ययोजना लागू की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।
“जनता की सुरक्षा से समझौता नहीं होगा” — विधायक गैसावत
विधायक जाकिर हुसैन गैसावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि मकराना की जनता की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो नगर परिषद के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “जब तक मकराना की सड़कों से आवारा सांडों और कुत्तों का आतंक खत्म नहीं होगा, तब तक जनता की आवाज लगातार उठती रहेगी।”

बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस दौरान पूर्व सभापति शोकत अली गौड़, पार्षद उमर सिसोदिया, पार्षद मो. कालिख, वार्ड पंच जसरी मोशीन, फ़िरोज़ पाजी, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष (ग्रामीण) दिलीप सिंह चौहान, पार्षद इरशाद गेसावत, पार्षद आदिल चौहान, बिरधाराम नायक, एमएच खान, अमर प्रजापत, अर्जुन डूडी, वीरू सॉर्गर, अनवर गहलोत, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष (शहर) नाथूराम मेघवाल, जीशान गेसावत, अरशद चौधरी, आमिर गेसावत सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अब नजर प्रशासन पर
मकराना में लगातार हो रहे हमलों और बढ़ते जनदबाव के बीच अब सभी की नजर प्रशासन पर टिकी हुई है। शहरवासियों का कहना है कि यदि अब भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। जनता फिलहाल सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सड़कों पर वास्तविक बदलाव चाहती है।
