मां का साया खोने के बाद वन विभाग बना सहारा, कुचामन के रेस्क्यू सेंटर में नन्हे वन्यजीवों की हो रही परवरिश

खारिया गांव के जंगल से रेस्क्यू कर लाया गया नीलगाय का बच्चा, तीन नन्हे नीलगाय शावकों समेत पांच नीलगायों की देखभाल में जुटी वन विभाग की टीम

कुचामन सिटी, बेजुबान वन्यजीव अपनी तकलीफ कह नहीं सकते, लेकिन उनकी पीड़ा को समझकर उन्हें नया जीवन देने की कोशिश इंसानियत की एक खूबसूरत मिसाल है। कुचामन सिटी स्थित वन विभाग कार्यालय परिसर का रेस्क्यू सेंटर इन दिनों ऐसे ही संवेदनशील प्रयास का गवाह बना हुआ है। यहां वन विभाग की टीम घायल और बेसहारा वन्यजीवों का उपचार करने के साथ उनकी देखरेख और पालन-पोषण में जुटी है। खास बात यह है कि सेंटर में फिलहाल तीन नन्हे नीलगाय के बच्चों सहित कुल पांच नीलगायों की देखभाल की जा रही है।


मां की मौत के बाद बेसहारा हुआ नीलगाय का बच्चा


वन विभाग की टीम ने बुधवार सुबह पास के खारिया गांव के जंगल से एक नीलगाय के बच्चे का रेस्क्यू किया। जानकारी के अनुसार, इस नन्हे वन्यजीव की मां की भी मौत हो चुकी थी, जिसके बाद वह बेसहारा हो गया। ऐसे में वन विभाग की टीम उसे सुरक्षित रेस्क्यू सेंटर लेकर आई। यहां उसके उपचार, भोजन और पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाई जा रही है, ताकि वह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जीने के योग्य बन सके।


रेस्क्यू सेंटर में तैनात चालक ओमप्रकाश शर्मा सहित विभाग के अन्य कर्मचारी नीलगाय के बच्चों की देखभाल में जुटे हैं। उनके खाने-पीने से लेकर उनकी जरूरतों तक का ध्यान रखा जा रहा है।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचती है वन विभाग की टीम

वन क्षेत्र में किसी वन्यजीव के घायल होने, चोटिल मिलने या संकट में होने की सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी टीम को मौके पर भेजते हैं। टीम वन्यजीव की स्थिति के अनुसार उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर वन विभाग कार्यालय परिसर स्थित सेंटर तक लाती है। यहां उसकी देखरेख और आवश्यक उपचार की व्यवस्था की जाती है।

वन विभाग के रेंजर अश्विनी पारीक ने बताया कि ग्रामीणों से घायल या चोटिल वन्यजीवों की सूचना मिलने पर विभाग की टीम उन्हें रेस्क्यू कर सेंटर लाती है।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में यहां नीलगाय, मोर, कछुए सहित विभिन्न प्रजातियों के कई वन्यजीवों को लाकर उनका उपचार किया जा चुका है। स्वस्थ होने के बाद उन्हें सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में वापस लौट सकें।

बेजुबानों की सेवा में जुटे कर्मचारी

रेस्क्यू सेंटर में चालक के पद पर कार्यरत ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि यहां लाए गए नीलगाय के बच्चों की देखभाल के साथ उनके खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है। वन्यजीवों की जरूरतों का ध्यान रखते हुए कर्मचारी उनकी नियमित निगरानी करते हैं।
वन विभाग के इन प्रयासों से न केवल घायल वन्यजीवों को उपचार मिल रहा है, बल्कि मां से बिछड़े और बेसहारा हुए नन्हे जीवों को भी सुरक्षित वातावरण मिल रहा है।

प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल वन विभाग की ही नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की है। जंगल या आसपास के क्षेत्र में कोई वन्यजीव घायल अथवा संकट में दिखाई दे, तो उससे छेड़छाड़ करने के बजाय वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। समय पर मिली सूचना किसी बेजुबान की जिंदगी बचाने में अहम साबित हो सकती है।

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