मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 7 मरीजों की आंखों में हुआ था संक्रमण
डीडवाना-कुचामन। कुचामन के राजकीय जिला अस्पताल में 28 जुलाई को मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद सात मरीजों की आंखों में संक्रमण का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। संक्रमण के चलते लूणवां शेरपुरा निवासी 61 वर्षीय खेमाराम की एक आंख की रोशनी चली गई है और चिकित्सकों के अनुसार संक्रमण के कारण आंख निकालने की नौबत आ गई है। परिजनों के अनुसार ऑपरेशन से पहले खेमाराम को दिखाई देता था, लेकिन ऑपरेशन के बाद संक्रमण बढ़ने से उसकी आंख की रोशनी चली गई। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने इलाज के साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है।

5 मरीज SMS जयपुर और 2 JLN अजमेर रेफर
28 जुलाई को जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में सात मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन किए गए थे। ऑपरेशन के अगले दिन जांच और ड्रेसिंग के दौरान ऑपरेशन वाली आंखों में असामान्य लक्षण दिखाई दिए। संक्रमण की आशंका के बाद पांच मरीजों को जयपुर के SMS अस्पताल और दो मरीजों को अजमेर के JLN अस्पताल रेफर किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुचामन जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग का ऑपरेशन थिएटर सीज कर दिया गया और जांच शुरू की गई।
विशेषज्ञ टीमों ने लिए थे OT, दवाइयों और उपकरणों के सैंपल
मामले की जांच के लिए चिकित्सा विभाग और SMS अस्पताल की विशेषज्ञ टीमों ने कुचामन पहुंचकर नेत्र विभाग और ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण किया। टीमों ने OT, उपकरण, इंजेक्शन और दवाइयों सहित विभिन्न स्थानों से सैंपल लिए। जयपुर में भर्ती मरीजों के उपचार के लिए मेडिकल बोर्ड भी गठित किया गया। संक्रमण की वास्तविक वजह और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसे लेकर जांच जारी है।
खेमाराम की आंख की रोशनी जाने से परिवार के सामने बड़ा संकट
लूणवां शेरपुरा निवासी खेमाराम कारीगरी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन से पहले उसकी आंख से दिखाई देता था, लेकिन संक्रमण के बाद आंख की रोशनी चली गई।

अब एक आंख निकालने की नौबत ने परिवार की परेशानी और बढ़ा दी है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज का खर्च उठाना भी चुनौती बन गया है। परिजनों और ग्रामीणों ने खेमाराम के बेहतर उपचार के साथ सरकारी स्तर पर उचित आर्थिक सहायता और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने प्रशासन को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम
मामले को लेकर पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर एवं CMHO के नाम पत्र देकर निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, बेहतर उपचार और उचित मुआवजे की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन को सात दिन का समय देते हुए कहा है कि इस अवधि में कार्रवाई और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही और मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

कलेक्टर बोले- सरकारी प्रावधानों के तहत पीड़ित परिवार को राहत दिलाने के प्रयास होंगे
जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने इस बारे में कहा कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को सरकारी स्तर पर जो भी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है और सरकार के जो भी निर्धारित प्रावधान हैं, उनके तहत परिवार को राहत दिलाने के पूरे प्रयास किए जाएंगे। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन स्तर पर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के साथ-साथ पीड़ित की स्थिति और परिवार की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

इन सात मरीजों में सामने आया था संक्रमण
संक्रमण की चपेट में आने वाले मरीजों में गोकुल कंवर पत्नी प्रहलाद सिंह (70), तोषिणा; हीरांराम पुत्र भगवाना राम (73), चितावा; मीरा पत्नी मोहनराम (58), चितावा; घासी राम पुत्र पेमाराम (64), सिंगरावट; नारायणी देवी पत्नी मनरूप राम (67), बोरावड़; कानूड़ी पत्नी बिरमाराम (71), कुचामन सिटी और खेमाराम पुत्र अर्जुन राम (61), लूणवां शामिल हैं।
ग्रामीणों की मांग- संक्रमण की वजह सामने आए और जिम्मेदारी तय हो
ग्रामीणों का कहना है कि जिला अस्पताल में इस वर्ष 714 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन किए जाने की जानकारी सामने आई थी और ऐसी घटना पहली बार सामने आने की बात कही गई थी। ऐसे में जांच के जरिए संक्रमण की वास्तविक वजह सामने लाकर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।

प्रशासन को दिए ज्ञापन के दौरान चेनाराम, भंवरलाल कुड़ी, शीशपाल चौधरी, ओम प्रकाश, गणपत, राजेंद्र प्रसाद जाट, नंदाराम, हीरालाल, चंदाराम, रामेश्वर मीणा, देवाराम, सीताराम, अशोक कुमार, प्रेमाराम बिजारणिया, हीराराम बाजुडोलिया, गोपाल राठी, श्रवणराम, बिरधाराम, रामफूल, सुखराम, दिनेश कुमार, पप्पूराम, बलवीर, राजूराम, गोविंदराम, गंगाराम, मोहन, अशोक, रामअवतार, लालाराम और रामलाल सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
