एक वार्ड… आधा दर्जन से ज्यादा भाजपा दावेदार, विपक्षी कांग्रेस के सामने प्रत्याशी का संकट; युवा उद्यमी महेश रामचंद्रका की दावेदारी ने बढ़ाई सियासी हलचल
कुचामन सिटी। नगर परिषद चुनाव को लेकर कुचामन में सियासी हलचल तेज हो गई है। 9 सितंबर को होने वाले मतदान को लेकर भाजपा और कांग्रेस सहित राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर दावेदारियां सामने आने लगी हैं। इसी बीच कुचामन नगर परिषद का वार्ड नंबर 27 अपनी अलग ही चुनावी कहानी को लेकर चर्चा में आ गया है। इस वार्ड में भाजपा के टिकट के लिए आधा दर्जन से ज्यादा दावेदारों ने आवेदन कर अपनी दावेदारी जताई है, वहीं कांग्रेस के सामने इस वार्ड में मजबूत प्रत्याशी तलाशने की चुनौती बताई जा रही है।

वार्ड 27 में भाजपा के कई चेहरे, लेकिन महेश रामचंद्रका की दावेदारी चर्चा में
वार्ड नंबर 27 से भाजपा के टिकट के लिए शहर की चर्चित शख्सियतों ने आवेदन किए हैं। इनमें युवा उद्यमी महेश रामचंद्रका, पूर्व विधायक एवं भाजपा के भीष्म पितामह के नाम से मशहूर रहे स्वर्गीय हरीश कुमावत के पुत्र राजेंद्र कुमावत, पूर्व पालिकाध्यक्ष राधेश्याम गट्टाणी के पुत्र रवि गट्टाणी, सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रंगनाथ काबरा, व्यवसायी मुन्ना लाल अग्रवाल ,पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ चुकीं हेमा गट्टाणी और कलावती गट्टाणी सहित अन्य दावेदार शामिल हैं।
सभी दावेदारों की अपने-अपने क्षेत्र में अलग पहचान है, लेकिन युवा उद्यमी महेश रामचंद्रका की दावेदारी को लेकर राजनीतिक गलियारों में विशेष चर्चा देखने को मिल रही है।

व्यवसाय से राजनीति तक बनाई अलग पहचान
महेश रामचंद्रका ने कम समय में व्यवसायी और बिल्डर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इसके साथ ही वे भाजपा संगठन से भी लंबे समय से जुड़े रहे हैं और शहर की सामाजिक गतिविधियों के साथ पार्टी के आयोजनों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं। यही वजह है कि वार्ड 27 में उनकी दावेदारी को पार्टी के सामने मौजूद मजबूत विकल्पों में गिना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर भी है कि यदि भाजपा महेश रामचंद्रका को वार्ड 27 से मैदान में उतारती है तो क्या वे पार्टी के लिए केवल पार्षद पद तक सीमित चेहरा होंगे या आगे चलकर सभापति पद के लिए भी मजबूत दावेदार बन सकते हैं।
इस बार कुचामन नगर परिषद के सभापति पद की लॉटरी अनारक्षित आने के कारण सामान्य वर्ग के नेताओं और दावेदारों में भी चुनाव को लेकर खासा उत्साह है। ऐसे में वार्ड 27 की यह दावेदारी आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
महेश रामचंद्रका ने आवेदन पेश कर क्या कहा?
भाजपा से टिकट के लिए आवेदन पेश करते हुए महेश रामचंद्रका ने कहा कि वे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पूरी निष्ठा के साथ संगठन के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा, उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने वार्ड के विकास, आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता से उठाने और संगठन को मजबूत करने की बात कही।
उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी संगठन सर्वे, कार्यकर्ताओं की राय और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए टिकट का निर्णय करेगा और उन्हें अवसर मिलता है तो वे पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरकर पार्टी को जीत दिलाने का प्रयास करेंगे।

एक तरफ दावेदारों की भरमार, दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने चुनौती
वार्ड 27 की तस्वीर इसलिए भी दिलचस्प है कि जहां भाजपा में टिकट के लिए कई चेहरे सामने आ गए हैं, वहीं कांग्रेस के सामने इस वार्ड से मजबूत उम्मीदवार तलाशने की चुनौती नजर आ रही है। ऐसे में यदि भाजपा अपने दावेदारों में से किसी मजबूत चेहरे को टिकट देती है और कांग्रेस अपेक्षाकृत कमजोर उम्मीदवार के साथ मैदान में उतरती है तो मुकाबले का समीकरण एकतरफा होने की संभावना पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि चुनाव में अंतिम तस्वीर टिकट वितरण, बगावत, निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी और वार्ड के स्थानीय मुद्दों के बाद ही साफ होगी।
टिकट की दौड़ में कौन मारेगा बाजी?
फिलहाल वार्ड 27 में भाजपा के कई दावेदार टिकट की दौड़ में हैं और हर दावेदार अपनी पकड़ और जनसमर्थन के आधार पर मजबूत होने का दावा कर रहा है। ऐसे में भाजपा संगठन के सामने भी एक मजबूत और जिताऊ चेहरे का चयन करना चुनौतीपूर्ण होगा।
वहीं महेश रामचंद्रका की दावेदारी ने इस वार्ड की चुनावी चर्चा को और तेज कर दिया है। अब निगाहें भाजपा की उस सूची पर टिकी हैं, जिसमें यह तय होगा कि वार्ड 27 की चुनावी चौसर पर कमल किस चेहरे के साथ उतरेगा।
