कुचामन सिटी। हनुमानपुरा स्थित कड़वों की ढाणी में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। कथा पांडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भगवान श्री बांके बिहारी की मनोहारी झांकी, पुष्प सज्जा और भक्तिमय वातावरण ने सभी का मन मोह लिया।

जयपुर के प्रसिद्ध कथावाचक परम पूज्य आचार्य श्री चन्द्रशेखर जी महाराज ने कथा के दौरान श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य, नैमिषारण्य की महिमा तथा राजा परीक्षित और शुकदेव जी के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त करना नहीं, बल्कि ईश्वर भक्ति, सत्कर्म और मानव सेवा के माध्यम से आत्मकल्याण करना है।

आचार्य श्री ने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में भगवान का स्मरण करता है, तब उसके जीवन के कष्ट स्वतः कम होने लगते हैं। उन्होंने भागवत कथा को कलियुग में मोक्ष का सरल और श्रेष्ठ मार्ग बताते हुए कहा कि कथा श्रवण से मन, बुद्धि और आत्मा का शुद्धिकरण होता है।

कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
आयोजक सुखाराम कड़वा ने बताया कि कथा महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन लीला, महारास और सुदामा चरित्र सहित श्रीमद्भागवत के विभिन्न दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिकाधिक संख्या में कथा में पहुंचकर धर्मलाभ लेने की अपील की।

कथा के अंत में महाआरती हुई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पूरे पांडाल में “राधे-राधे” और “जय श्री कृष्ण” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
