कुचामन सिटी के स्टेशन रोड पर स्थित कुचामन वैली में रविवार को मदर्स डे भावनात्मक और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। कार्यक्रम में मातृत्व, संस्कार और परिवारिक मूल्यों को सम्मान देने के उद्देश्य से विशेष आयोजन किया गया, जहां प्रेमचंद मोहन ट्रस्ट की संरक्षिका चंद्रकला देवी माथुर का ट्रस्ट सदस्यों और उपस्थित लोगों द्वारा स्वागत और अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान चंद्रकला देवी माथुर से मदर्स डे के उपलक्ष्य में केक कटवाया गया। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियों और शुभकामनाओं के साथ मातृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर अरशद अख्तर कुरैशी, श्यामलाल कुमावत,प्रभु दयाल सिंह, रितु माथुर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

वीडियो कॉल के जरिए दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम का भावुक पल उस समय देखने को मिला जब चंद्रकला देवी माथुर के सुपुत्र एवं श्री राम बालाजी डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राजकुमार माथुर ने वीडियो कॉल के माध्यम से अपनी माता को मदर्स डे की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपनी मां के प्रति सम्मान और भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि मां का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी ताकत होता है।
“मां जीवन की पहली गुरु होती है” — राजकुमार माथुर
वीडियो कॉल के दौरान राजकुमार माथुर ने कहा कि मां केवल जन्म देने वाली नहीं बल्कि जीवन की पहली गुरु होती है, जो हर परिस्थिति में अपने बच्चों को सही दिशा दिखाती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में परिवारिक संस्कारों और माता-पिता के सम्मान को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मदर्स डे केवल एक दिन का उत्सव नहीं बल्कि मां के त्याग, प्रेम और संघर्ष को याद करने का अवसर है। उन्होंने सभी लोगों से अपने माता-पिता का सम्मान करने और उनके साथ समय बिताने की अपील भी की।
“ममता से बड़ा कोई रिश्ता नहीं” — चंद्रकला देवी माथुर
चंद्रकला देवी माथुर ने इस अवसर पर कहा कि मां का रिश्ता दुनिया का सबसे पवित्र और निस्वार्थ रिश्ता होता है। मां हमेशा अपने परिवार और बच्चों की खुशियों के लिए समर्पित रहती है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में परिवारों को एकजुट रखने और संस्कारों को जीवित रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी माताओं की ही होती है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों का आभार जताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।
“मदर्स डे हमें संवेदनशील बनाता है” — अरशद अख्तर कुरैशी
अरशद अख्तर कुरैशी ने कहा कि मदर्स डे केवल उत्सव नहीं बल्कि भावनाओं और सम्मान का प्रतीक है। मां के त्याग और संघर्ष को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि समाज में यदि संस्कार और संवेदनशीलता को जीवित रखना है तो हमें अपने माता-पिता और विशेष रूप से माताओं का सम्मान करना होगा। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को परिवार और रिश्तों की अहमियत समझाने का काम करते हैं।

