बड़ी बेरी में आस्था और एकता का संगम, दो दिवसीय मोर दादी महोत्सव संपन्न

डीडवाना-कुचामन जिले के बड़ी बेरी गांव में आयोजित दो दिवसीय मोर दादी महोत्सव श्रद्धा, आस्था और सामाजिक एकता के माहौल में संपन्न हो गया। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों से भी मोर (गोयल) समाज के प्रतिनिधि बड़ी बेरी स्थित प्राचीन मोर दादी मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर मां दादी का आशीर्वाद लिया।

महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें आसपास के ग्रामीणों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया।

श्रद्धालुओं की मान्यता है कि संकट और आपदा के समय मां दादी से की गई सच्चे मन की प्रार्थना से संकट दूर होता है तथा यहां मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं।

आयोजन समिति से जुड़े कुचामन सिटी निवासी अशोक मोर ने बताया कि मोर दादी मंदिर का इतिहास 400 वर्षों से भी अधिक पुराना है। यह प्राचीन शक्ति स्थल मोर (गोयल) समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां देशभर में फैले समाजबंधु वर्षों से पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि मोर दादी मंदिर ने अलग-अलग क्षेत्रों में बसे समाज के लोगों को एकजुट रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मंदिर की विशेषता यह है कि यहां किसी देवी-देवता की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित नहीं है, बल्कि शक्ति और सामर्थ्य के प्रतीक त्रिशूल की पूजा की जाती है।

सत्यनारायण मोर ने बताया कि मोर समुदाय से जुड़े सामाजिक और पारिवारिक कार्यों में सबसे पहले मोर दादी का स्मरण कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। समाज के लोग अपने हर शुभ और महत्वपूर्ण कार्य से पहले मां दादी की पूजा-अर्चना को विशेष महत्व देते हैं।

ममता कंवर ने बताया कि मोर दादी केवल मोर समुदाय ही नहीं, बल्कि आसपास के विभिन्न समाजों के लोगों की भी गहरी आस्था है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर मां दादी के दर्शन करते हैं और अपनी मन्नत मांगते हैं।

महोत्सव में कलकत्ता और हैदराबाद से राजेंद्र मोर, महेश मोर, पवन मोर, रोहित मोर और विजय मोर सहित विभिन्न क्षेत्रों से समाजबंधु पहुंचे। वहीं कुचामन सिटी से अशोक कुमार मोर, सुभाष मोर, राजकुमार मोर, सत्यनारायण मोर, ओंकार, पंकज और विकास मोर सहित देशभर से आए मोर (गोयल) समाज के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने आयोजन में भाग लिया।

दो दिवसीय मोर दादी महोत्सव ने देश के अलग-अलग हिस्सों में बसे मोर (गोयल) समाज के लोगों को अपनी जड़ों, परंपराओं और आस्था से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का भी सुंदर संदेश देखने को मिला।

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