पालना गृह में गूंजी किलकारी: अस्पताल स्टाफ की सतर्कता से बची नवजात की जान, उपचार के बाद नागौर शिशु गृह किया शिफ्ट
कुचामन जिला अस्पताल के पालना गृह में मिला 3-4 दिन का नवजात, समय पर उपचार से बची जान; अब तक 17 बच्चों को मिल चुका नया जीवन
कुचामन सिटी। डीडवाना-कुचामन जिले के राजकीय जिला अस्पताल के पालना गृह में सोमवार देर शाम एक अज्ञात महिला अपने तीन-चार दिन के नवजात शिशु को छोड़कर चली गई। पालना गृह में लगे अलार्म की घंटी बजते ही अस्पताल स्टाफ की तत्परता से नवजात को तत्काल उपचार मिला और उसकी जान बच गई। उपचार के बाद बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार बच्चे को बेहतर देखभाल के लिए नागौर स्थित शिशु गृह भेज दिया गया।

अलार्म बजते ही हरकत में आया अस्पताल स्टाफ
पालना गृह में लगे अलार्म की घंटी बजते ही ड्यूटी पर तैनात एसएनसीयू इंचार्ज मोनिका पारीक ने तत्काल नर्सिंग अधिकारी भारती दायमा को पालना गृह भेजा। भारती दायमा सबसे पहले मौके पर पहुंचीं और पालने में बिलखते नवजात को सुरक्षित शिशु वार्ड में पहुंचाया। इसके बाद मोनिका पारीक ने अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी। अस्पताल स्टाफ की तत्परता के चलते नवजात को तुरंत उपचार मिल सका।
पीएमओ ने दिए निर्देश, एसएनसीयू में शुरू हुआ इलाज
सूचना मिलते ही पीएमओ डॉ. बलबीर ढाका ने शिशु रोग विभाग के नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. इशाक देवड़ा सहित पूरी टीम को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद एसएनसीयू इंचार्ज मोनिका पारीक, सीनियर नर्सिंग अधिकारी राधेश्याम कांसोटिया और चिकित्सा दल ने नवजात को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती कर उपचार शुरू किया।

डॉ. इशाक देवड़ा बोले— समय पर इलाज मिलने से नवजात पूरी तरह स्वस्थ
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. इशाक देवड़ा ने बताया कि नवजात की उम्र करीब तीन से चार दिन है और उसका वजन 1 किलो 300 ग्राम है। समय पर चिकित्सा मिलने से बच्चे की स्थिति पूरी तरह स्थिर और स्वस्थ है। उन्होंने कहा कि पालना गृह जैसी व्यवस्था उन नवजातों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, जिन्हें किसी कारणवश उनके परिजन अपने साथ नहीं रख पाते।

पीएमओ बोले— बच्चे की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता
पीएमओ डॉ. बलबीर ढाका ने बताया कि घटना की सूचना तत्काल प्रशासन और कुचामन पुलिस को दे दी गई। अस्पताल प्रशासन की पहली प्राथमिकता नवजात को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना था, जिसमें पूरी टीम ने समन्वय के साथ कार्य किया। उपचार के बाद बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार बच्चे को नागौर के राजकीय अस्पताल परिसर स्थित शिशु गृह भेज दिया गया, जहां वह चिकित्सकों की निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित है।

इस टीम ने नवजात को पहुंचाया नागौर
नवजात को नागौर शिशु गृह पहुंचाने वाली टीम में ललिता माली (नर्सिंग अधिकारी), उमाशंकर (नर्सिंग अधिकारी), बलवीर सिंह (ड्राइवर) तथा कुचामन पुलिस थाने की कांस्टेबल गिरवर कंवर शामिल रहे।
कुचामन का पालना गृह बना मासूमों के लिए जीवन की नई उम्मीद
डॉ. बलबीर ढाका ने बताया कि अजमेर संभाग में कुचामन अस्पताल ऐसा पहला अस्पताल है, जहां पालना गृह में अब तक 17 नवजात शिशु मिल चुके हैं। इनमें 9 बालक और 8 बालिकाएं शामिल हैं। इसके अलावा एक नवजात अस्पताल परिसर के बाहर भी मिला था। यह आंकड़ा डीडवाना-कुचामन और नागौर जिले में सबसे अधिक है।

क्या है पालना गृह का उद्देश्य?
सरकार की योजना के तहत अस्पतालों में स्थापित पालना गृह का उद्देश्य ऐसे नवजात शिशुओं को सुरक्षित आश्रय देना है, जिन्हें किसी कारणवश उनके परिजन अपने साथ नहीं रख पाते। पहले कई बार नवजातों को झाड़ियों, सुनसान स्थानों या कचरे के ढेर में छोड़ने जैसी दर्दनाक घटनाएं सामने आती थीं। इन्हीं घटनाओं को रोकने और मासूमों को सुरक्षित जीवन देने के लिए पालना गृह की व्यवस्था शुरू की गई, जो आज कई बच्चों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बन चुकी है।
ये रहे मौजूद
इस दौरान पीएमओ डॉ. बलबीर ढाका, डॉ. इशाक देवड़ा, डॉ. शकील मोहम्मद राव, डॉ. हरीश ढाका, सीनियर नर्सिंग अधिकारी राधेश्याम कांसोटिया, एसएनसीयू इंचार्ज मोनिका पारीक, नर्सिंग अधिकारी भारती दायमा, ललिता माली, उमाशंकर, बलवीर सिंह सहित अस्पताल का चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहा।
