40 दिवसीय समर कैम्प का भव्य समापन: 150 प्रशिक्षुओं ने दिखाई प्रतिभा, रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कुचामन सिटी। भारतीय संगीत सदन संस्थान, कुचामन सिटी के तत्वावधान में स्वर्गीय श्रीमती उर्मिला देवी कनोई की स्मृति में सत्यनारायण कनोई द्वारा आयोजित 40 दिवसीय समर कैम्प का भव्य समापन समारोह रविवार को उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच सम्पन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि खारिया सरपंच देवीलाल दादरवाल तथा विशिष्ट अतिथि संत श्री भगवान दास जी रहे।

संस्थान के उपाध्यक्ष सुनील माथुर, सचिव घनश्याम गौड़ एवं संरक्षक विनोद आचार्य ने अतिथियों का साफा, दुपट्टा एवं माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में संगीत शिक्षकों, संवाददाताओं तथा संस्थान से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी सम्मान किया गया।

150 प्रशिक्षुओं ने लिया प्रशिक्षण

कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार 40 दिवसीय समर कैम्प में करीब 150 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। संस्थान के व्यवस्थापक भानुप्रकाश औदिच्य ने बताया कि 5 वर्ष से 25 वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चों और युवाओं को संगीत एवं नृत्य की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया।

संस्थान के संरक्षक विनोद आचार्य ने बताया कि कैम्प में हारमोनियम, गायन, तबला, ढोलक, गिटार, आर्गन, कत्थक एवं वेस्टर्न डांस जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे प्रतिभागियों के व्यक्तित्व एवं कलात्मक कौशल का विकास हुआ।

इन शिक्षकों ने दी प्रशिक्षण की जिम्मेदारी

समर कैम्प में विभिन्न विधाओं के लिए अनुभवी प्रशिक्षकों ने अपनी सेवाएं दीं। हारमोनियम एवं गायन का प्रशिक्षण असलम खरादी ने दिया। ढोलक एवं तबला की जिम्मेदारी औम दमामी और विनोद राणा ने संभाली। किशोर कत्थक ने कत्थक नृत्य की बारीकियां सिखाईं, जबकि आशिष रावल ने वेस्टर्न डांस का प्रशिक्षण दिया। वहीं विजय कुमार ने आर्गन एवं गिटार वादन का प्रशिक्षण प्रदान किया।

प्रस्तुतियों ने मोहा मन

समापन समारोह में प्रशिक्षुओं ने अपनी सीखी हुई कला का शानदार प्रदर्शन किया। कत्थक नृत्य की जूनियर वर्ग की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। वेस्टर्न डांस में राजस्थानी, देशभक्ति और बॉलीवुड गीतों पर बच्चों की प्रस्तुतियों को खूब सराहना मिली। गिटार एवं तबला वादन के साथ हारमोनियम पर सरगम अलंकार, भजन गायन, पैरोडी और राग दरबारी की प्रस्तुति दर्शकों के लिए यादगार रही।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में ठुमरी एवं कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुतियों ने सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया।

प्रवासी भामाशाह के सहयोग का जताया आभार

संस्थान से जुड़े पत्रकार एवं उपाध्यक्ष मुरारी गौड़ ने समर कैम्प के सफल आयोजन के लिए प्रवासी भामाशाह सत्यनारायण कनोई का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और सामाजिक सरोकारों के कारण ही बच्चों को संगीत एवं संस्कृति से जोड़ने वाला यह आयोजन लगातार सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।

बच्चों और युवाओं को रुचि के मुताबिक मंच प्रदान करना ही उद्देश्य – अध्यक्ष शिव कुमार 

संस्थान के अध्यक्ष शिव कुमार अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संगीत सदन पिछले कई वर्षों से संगीत एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि समर कैम्प का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को उनकी रुचि के अनुरूप मंच प्रदान करना तथा उनमें छिपी प्रतिभाओं को निखारना है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले भामाशाहों, प्रशिक्षकों, अभिभावकों एवं संस्थान के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

सरस्वती वंदना से हुआ शुभारम्भ

इससे पहले कार्यक्रम का शुभारम्भ मुकेश राजपुरोहित एवं किशोर कत्थक द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का प्रतिवेदन डॉ. प्रकाश टेलर ने प्रस्तुत किया। प्रभात प्रधान द्वारा कैम्प के दौरान प्रशिक्षुओं के लिए अल्पाहार व्यवस्था में किए गए सहयोग की भी सराहना की गई।

कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र कुमार मिश्रा एवं प्रदीप आचार्य ने किया। इस अवसर पर बनवारीलाल मोर, रमेश चावला, अनिल माथुर, मनोहर पारीक, ओमप्रकाश कुमावत, कमल गौड़, रूपसिंह राजपुरोहित, रविकांत, महेन्द्र लाटा, प्यारेलाल, प्रकाश दाधीच, सत्यनारायण मोर, आरती सर्वा, मोहम्मद यूसुफ, सुरेश टेलर, गौरव जैन सहित शहर के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।

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