रमज़ान में राम और दिवाली में अली का संदेश, आचार्य चंद्रशेखर जी महाराज ने सामाजिक सौहार्द, संस्कार और राष्ट्र निर्माण पर रखे विचार
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मीडिया से रूबरू हुए आचार्य श्री

कुचामन सिटी। हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान कथा व्यास एवं राष्ट्रवादी विचारक परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज (जयपुर) ने मीडिया से बातचीत करते हुए समाज, युवाओं, अभिभावकों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर समाज को संदेश दिए ।
उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता में निहित है तथा इन मूल्यों को बचाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सामाजिक सौहार्द और राष्ट्र निर्माण पर दिया संदेश
आचार्य श्री ने सामाजिक सौहार्द पर बोलते हुए कहा कि सभी धर्म और समुदाय मानवता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता है और सभी समुदायों को आपसी सद्भाव के साथ रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि “इस्लाम धर्म के रमज़ान में राम बसे हैं और हिंदू समाज की दिवाली में अली का वास है।” उनका कहना था कि यह भाव हमें एक-दूसरे का सम्मान करने, साथ मिलकर रहने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि धर्म कभी विभाजन नहीं सिखाता, बल्कि लोगों को जोड़ने और समाज में प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारे का वातावरण बनाने का संदेश देता है।
वृद्धाश्रम की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए : आचार्य श्री
परिवार व्यवस्था और बुजुर्गों की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों की परवरिश, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए जीवनभर संघर्ष करते हैं, लेकिन जब वही माता-पिता वृद्धावस्था में उपेक्षित हो जाते हैं तो यह समाज के लिए चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी परिस्थितियां नहीं बननी चाहिए कि वृद्धाश्रमों की आवश्यकता पड़े। भारतीय संस्कृति में माता-पिता को भगवान के समान माना गया है और उनकी सेवा करना प्रत्येक संतान का कर्तव्य है।

इस दौरान उन्होंने पद्मश्री से सम्मानित वाराणसी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में सैकड़ों आध्यात्मिक पुस्तकें लिखीं, समाज को दिशा दी और सम्मान प्राप्त किया, लेकिन हाल ही में जीवन के अंतिम समय में उन्हें वृद्धाश्रम में रहना पड़ा। उनका अंतिम संस्कार लोगों ने sahyog करके किया, जबकि उनके पुत्र और पुत्री इस मौके पर नहीं आए।

आचार्य श्री ने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को आत्ममंथन करने के लिए मजबूर करती हैं और यह सोचने की आवश्यकता है कि हम अपने बुजुर्गों के प्रति अपने दायित्वों का कितना निर्वहन कर रहे हैं।
मोबाइल और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर जताई चिंता
युवाओं और मोबाइल संस्कृति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल और सोशल मीडिया का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। तकनीक का उपयोग ज्ञान और विकास के लिए होना चाहिए, लेकिन उसका दुरुपयोग समाज के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने हाल के वर्षों में बढ़ रही पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया पर अनावश्यक समय व्यतीत करने के बजाय शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, परिवार और राष्ट्रहित के कार्यों में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए।

युवाओं को संस्कार और अभिभावकों को संवाद बढ़ाने की सलाह
आचार्य श्री ने युवाओं को अनुशासन, संस्कार और माता-पिता के सम्मान का संदेश देते हुए कहा कि सफलता केवल डिग्री प्राप्त करने से नहीं, बल्कि अच्छे चरित्र और नैतिक मूल्यों से मिलती है। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया।
तीन संतानों का दिया संदेश, एक राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित हो
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे धार्मिक आयोजन समाज को अध्यात्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।

आचार्य श्री ने समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार को एक या दो नहीं, बल्कि तीन संतानों का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहली संतान माता-पिता की सेवा और संस्कारों के संरक्षण के लिए, दूसरी संतान समाज एवं विभिन्न लोककल्याणकारी कार्यों के लिए तथा तीसरी संतान राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित हो।
आचार्य श्री के अनुसार, जब परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ नई पीढ़ी का निर्माण होगा, तब देश में सद्भाव, उन्नति और वैभव का विस्तार होगा तथा भारत अपने सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव के पथ पर निरंतर अग्रसर रहेगा।

कथा स्थल पर उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
गौरतलब है कि हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में 1 जून से 9 जून तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जयपुर के प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का रसपान करा रहे हैं। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन, धार्मिक झांकियों और प्रवचनों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
