इलाज के नाम पर 8.25 लाख का बिल, शव देने से पहले मांगे 7.25 लाख; राजस्व राज्य मंत्री ने हस्तक्षेप कर कराया पूरा बिल माफ,दिलाया शव

इलाज के नाम पर 8.25 लाख का बिल, शव देने से पहले मांगे 7.25 लाख; राजस्व राज्य मंत्री ने हस्तक्षेप कर कराया पूरा बिल माफ,दिलाया शव

कुचामन के बजरंग लाल अग्रवाल के निधन के बाद निजी अस्पताल में सामने आया मामला,

कुचामन सिटी। निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर भारी-भरकम बिल और उसके बाद बकाया राशि की वसूली को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। कुचामन सिटी के एक परिवार के साथ जयपुर के निजी अस्पताल में सामने आया मामला इसी संवेदनशील मुद्दे को फिर चर्चा में ले आया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में एक जनप्रतिनिधि की मानवीय पहल भी सामने आई, जब नावां विधायक एवं राजस्व राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी ने अस्पताल प्रबंधन से बातचीत कर करीब 7.25 लाख रुपए का बकाया बिल माफ करवाया और मृतक का पार्थिव देह परिजनों को सम्मानपूर्वक दिलवाया।


जानकारी के अनुसार नावां विधानसभा क्षेत्र के नालोट निवासी एवं वर्तमान में कुचामन सिटी निवासी बजरंग लाल अग्रवाल की सोमवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें उपचार के लिए कुचामन से जयपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिजनों के अनुसार अस्पताल में भर्ती के समय ही एक लाख रुपए एडवांस जमा करवाए गए।
दुर्भाग्यवश मंगलवार सुबह उपचार के दौरान बजरंग लाल अग्रवाल का निधन हो गया। परिजनों के अनुसार अस्पताल की ओर से महज करीब तीन-चार घंटे के उपचार के बाद कुल 8 लाख 25 हजार रुपए का बिल बनाया गया। इसमें एक लाख रुपए एडवांस जमा होने के बाद करीब 7.25 लाख रुपए बकाया बताए गए।

परिजनों के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन ने बकाया राशि जमा करवाने के बाद ही पार्थिव देह सौंपने की बात कही। अचानक परिवार के सामने इतनी बड़ी राशि की मांग और अपने प्रियजन को खोने का दुख, दोनों परिस्थितियों ने परिजनों को बेहद परेशान कर दिया।

जानकारी मिलते ही अस्पताल पहुंचे मंत्री विजय सिंह चौधरी

मामले की जानकारी मिलने पर नावां विधायक एवं राजस्व राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से बातचीत की और शोकाकुल परिवार की स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर राहत देने का आग्रह किया।

विजय सिंह चौधरी के अनुसार बातचीत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने करीब 7.25 लाख रुपए का पूरा बकाया बिल माफ करने पर सहमति जताई, जिसके बाद मृतक का पार्थिव देह परिजनों को सौंप दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक तरफ निजी अस्पतालों में इलाज के खर्च और बिलिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, तो दूसरी तरफ यह भी दिखाया कि संकट की घड़ी में जनप्रतिनिधि का हस्तक्षेप किसी परिवार के लिए कितनी बड़ी राहत बन सकता है।

राजस्थान प्रदेश में बकाया बिल के लिए शव रोकने पर स्पष्ट रोक

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू राजस्थान सरकार के नियमों से जुड़ा है। राजस्थान Honour of Dead Body Rules, 2025 में अस्पतालों के लिए स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि अस्पताल प्रशासन बिलों के भुगतान न होने के आधार पर किसी मृत शरीर को अपने कब्जे में नहीं रख सकता।
नियमों में कहा गया है कि अस्पताल को मृतक के परिवार या लोक प्राधिकारी को गरिमापूर्ण तरीके से मृत शरीर सौंपना होगा। यानी अस्पताल का बकाया बिल एक अलग वित्तीय विवाद हो सकता है, लेकिन बिल की वसूली के लिए शव को रोककर रखना नियमों के अनुरूप नहीं है।


ऐसे में बजरंग लाल अग्रवाल के मामले में सामने आया घटनाक्रम इस महत्वपूर्ण सरकारी प्रावधान की ओर भी ध्यान खींचता है। हालांकि इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई स्वतंत्र पक्ष सामने आना बाकी है।

कुचामन नगर परिषद के सभापति महेश रामचंद्रका ने इस पूरे घटनाक्रम में मंत्री विजय सिंह चौधरी के हस्तक्षेप और परिवार को मिली राहत को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़ा होना और आर्थिक संकट से राहत दिलाना मानवीय संवेदना का परिचय है और दूसरों के लिए मिसाल है ।

परिजनों ने विजय सिंह चौधरी का जताया आभार

मृतक के परिजनों ने इस संकट की घड़ी में आगे आकर अस्पताल प्रबंधन से बातचीत करने और बकाया राशि माफ करवाकर पार्थिव देह दिलवाने के लिए राजस्व राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी का आभार जताया।
परिजनों में मृतक के भाई सोहनलाल, रामलाल, पूर्णमल, शंकरलाल, शिवभगवान, श्यामलाल और सुन्दर लाल, पुत्र रोहित एवं मोहित, भतीजे दिनेश, मनीष, विनोद, पुनीत एवं प्रकाश, सहित समस्त नालोटवाला परिवार शामिल है।

परिजनों का कहना है कि एक तरफ परिवार अपने सदस्य को खोने के गहरे सदमे में था, वहीं दूसरी ओर लाखों रुपए के अस्पताल बिल ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी थी। ऐसे समय में मंत्री विजय सिंह द्वारा अस्पताल पहुंचकर मामले में हस्तक्षेप करना उनके लिए बड़ी राहत साबित हुआ।

एक घटना, दो बड़े सवाल

यह घटना दो महत्वपूर्ण सवाल छोड़ती है। पहला, निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान बनने वाले भारी-भरकम बिलों की निगरानी और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित हो। दूसरा, किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु के बाद क्या आर्थिक देनदारी की वसूली के लिए पार्थिव देह को रोकना उचित है?

राजस्थान सरकार के 2025 के नियम इस दूसरे सवाल का जवाब स्पष्ट रूप से देते हैं। बकाया बिल के आधार पर शव को रोका नहीं जा सकता। बजरंग लाल अग्रवाल के मामले में मंत्री विजय सिंह चौधरी का हस्तक्षेप इसी मानवीय और कानूनी भावना को सामने लाता है।

error: News 1 Rajasthan